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मुंबई बंद : आंदोलन और मौत के बाद बातचीत के लिए तैयार सरकार, दो विधायकों ने दिया इस्तीफा

July 26th, 2018 11:45 IST

हाईलाइट

  • मराठा आरक्षण की मांग को लेकर महाराष्ट्र में शुरू हुआ आंदोलन अब हिंसक हो गया है।
  • औरंगाबाद में एक युवक ने गोदावरी नदी में कूदकर अपनी जान दे दी है।
  • वहीं महाराष्ट्र के कई इलाकों में गाड़ियों, बसों और ट्रकों को तोड़फोड़ कर आग के हवाले कर दिया गया है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मराठा आरक्षण की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने एक बार पुलिस पर पथराव किया। छह घंटे लंबे जाम के बाद मुंबई-पुणे हाईवे को पुलिस प्रशासन की मदद से खुलवाया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्च करने के साथ आंसू गैसे के गोले भी छोड़े। इससे पहले मराठा आरक्षण आंदोलन क्रांति के बीच मराठा क्रांति मोर्चा ने मुंबई बंद का फैसला वापस लिया था।


आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एक नेता ने कहा कि लोगों को दफ्तर से घर लौटने में दिक्कत न हो इसलिए आंदोलन को वापस लिया गया है। वहीं मुंबई, नवी मुंबई, पालघर, ठाणे, कल्याण, सातारा, नासिक में बंद का हिंसक असर देखने को मिला है। इसी बीच महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने कहा है कि हम आरक्षण की मांग कर रहे संगठनों से बातचीत करने के लिए तैयार है। सीएम फडणवीस ने कहा है कि, इस मराठा समुदाय के लिए आरक्षण का कानून बनाया गया है, लेकिन इस पर मुंबई हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। मराठा आंदोलन को लेकर शिवसेना विधायक के बाद एनसीपी विधायक भाऊसाहब चिकटगांवकर ने इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े के कार्यालय को ई-मेल के जरिये भिजवा दिया।


बंद के दौरान नवी मुंबई को मराठा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह से जाम कर दिया। यहां पुलिस की भी एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया। इस दौरान पुलिस को भी हवाई फायर करना पड़ा। बंद के दौरान मराठा कार्यकर्ताओं ने ठाणे स्टेशन पर ट्रेन रोकने की भी कोशिश की। आरक्षण की मांग को लेकर मंगलवार से शुरू हुआ मराठा आंदोलन अब तक काफी हिंसक रहा है। महाराष्ट्र के 15 जिलों में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है, जहां तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इस आंदोलन में अब तक एक कांस्टेबल समेत 2 लोगों की मौत हो चुकी है।

सतारा में बेकाबू भीड़ का पुलिस पर हमला 
महाराष्ट्र के सातारा जिले में आंदोलनकारियों ने पुलिस को निशाना बनाते हुए जमकर पथराव किया। जिसमें पुलिस अधीक्षक संदीप पाटील समेत अन्य चार पुलिस कर्मी घायल हो गए। पुलिस वैन में भी तोड़फोड़ की गई। भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस को हवा में गोलियां चलानी पड़ी, साथ ही गैस के गोले छोड़ने पड़े। राजवाड़ा से जिलाधिकारी कार्यालय तक मोर्चा निकाला गया था। उसके बाद कुछ आंदोलनकारी मुंबई-बेंगलुरू नेशनल हाईवे रोकने के लिए गए। जहां आंदोलनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। टायर जलाकर यातायात रोका। इस दौरान पुलिस को हल्के बल का प्रयोग करना पड़ा। कराड़ में भी प्रदर्शनकारियों ने आगजनी कर दुपहिया रैली निकालकर बंद करवाया।  
 

मुंबई बंद LIVE Update....
 

हिंसा के बीच मराठा क्रांति मोर्चा ने मुंबई बंद वापस ले लिया। लोगों को घर लौटने में दिक्कत न हो इसलिए आंदोलन को वापस लिया गया।
 

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा है कि महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन के लिए बीजेपी जिम्मेदार है। आंदोलनकारियों को नहीं समझा पाना बीजेपी की विफलता है।

एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र में आरक्षण के लिए चल रहे मराठा समुदाय के आंदोलन का मुद्दा आज लोकसभा में उठाया और कहा कि मराठा और धनगर समुदायों की मांगों को पूरा करके उनके साथ न्याय किया जाना चाहिए।

हिंसक आंदोलन की वजह से पूरी मुंबई की लोकल सेवा भी ठप हो गई है। आंदोलन के दौरान पुलिस की तीन गाड़ियों को भी तोड़फोड़ कर आग के हवाले कर दिया गया।

मुंबई में मराठा क्रांति मोर्चा के कार्यकर्ता दुकानदारों से हाथ जोड़कर अपनी दुकान बंद करने का आग्रह कर रहे हैं।

हिंसक मराठा आंदोलन के दौरान ठाणे इलाके में माजिवादा पुल के पास प्रदर्शन के दौरान टायरों में आग लगा दी गई।


शासन ने अफवाहों को रोकने के लिए औरंगाबाद में इंटरनेट सेवाएं बंद कर गईं। वहीं गंगापुर में पत्थरबाजी के दौरान एक पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत हो गई। एसएल काटगावकर ओस्मनाबाद जिले में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे उन्हें ड्यूटी के लिए गंगापुर में नियुक्त किया गया था। भीड़ की तरफ से की गई पत्थरबाजी के दौरान उन्हें हार्ट अटैक आ गया और उनकी मौत हो गई। वहीं 26 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बता दें कि सोमवार को जलसमाधि आंदोलन करते हुए गोदावरी नदी में कूदकर काकासाहेब सिंदे नाम के एक युवक ने अपनी जान दे दी थी, जिसके बाद से ये आंदोलन और ज्यादा भड़क गया। काकासाहेब की मौत के बाद मराठा क्रांति मोर्चा ने मंगलवार को महाराष्ट्र बंद का ऐलान किया था।

औरंगाबाद, मुंबई के अलावा कोल्हापुर, सातारा, सोलापुर और पुणे में हालात तनाव पूर्ण हो गए। आंदोलनकारी काकेसाहेब को शहीद का दर्जा देने की भी मांग करने लगे। काकासाहेब शिंदे का मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में मराठा समुदाय के लोगों के अलावा कई राजनेता भी शामिल हुए। हालांकि मराठा समाज के लोगों ने अंतिम संस्कार में नेताओं के आने पर आपत्ति उठाई और उनका विरोध किया। उधर, शिवसेना ने मराठा आरक्षण का समर्थन किया है। मराठा क्रांति समाज ने कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।  बढ़ती हिंसा को देखते हुए औरंगाबाद के डीएम उदय चौधरी ने मराठा क्रांति मोर्चा की अधिकांश मांगे मान ली है। डीएम उदय चौधरी ने बताया कि सरकार मृतक काकासाहेब शिंदे के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देगी। साथ ही उनके छोटे भाई को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। 

औरंगाबाद में ही मराठा आंदोलन के दौरान मराठा क्रांति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने गंगापुर के पास ही हाईवे पर एक ट्रक को आग के हवाले कर दिया। 

वैसे तो मराठा आरक्षण की मांग लंबे समय से हो रही है, लेकिन बीते कुछ दिनों से आरक्षण के लिए आंदोलन तेज हो गया है। सीएम देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ लोग कड़ी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की मांग की जा रही है। पिछले साल 9 अगस्त को मराठा समाज के लाखों लोगों ने महाराष्ट्र की सड़कों पर उतर कर एक बड़ा मार्च निकाला था। यह मार्च औरंगाबाद से शुरू होकर मुंबई में समाप्त हुआ था। उस समय सूबे के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मराठा समाज की मांगों पर कई आश्वासन दिए थे। मुख्यमंत्री ने मराठा समाज के लिए घोषणाओं के साथ ही उनकी समस्याओं के निराकरण के लिये कैबिनेट की उप समिति बनाने का भी वादा किया था। 

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