दैनिक भास्कर हिंदी: शिवसेना-भाजपा में नहीं है कोई तालमेल : धनंजय मुंडे

March 7th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर भाजपा की ओर से चर्चा शुरू करने के बाद उसके अनुमोदन के लिए शिवसेना के एक भी सदस्य के सदन में मौजूद नहीं रहने पर विपक्ष ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। सदन में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने कहा कि सदन में भाजपा के सदस्य प्रवीण दरेकर ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया, लेकिन प्रस्ताव के अनुमोदन के लिए शिवसेना का कोई सदस्य मौजूद नहीं है। मुंडे ने कहा कि यह राज्यपाल का अपमान है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस के सदस्य सुनील तटकरे ने कहा कि सरकार के दोनों दलों के बीच तालमेल का अभाव है। सरकार के खिलाफ बयानबाजी करने का शिवसेना एक भी मौका नहीं छोड़ती है। इसलिए शिवसेना के सदस्यों ने प्रस्ताव पर चर्चा के लिए दूरी बना ली। तटकरे ने कहा कि सरकार बजट सत्र में कामकाज को लेकर गंभीर नहीं है।

सरकार में शामिल होने की ताक में रहती है NCP: अनिल परब
इस बीच सदन में शिवसेना के सदस्य अनिल परब पहुंचे। उन्होंने कहा, 'एक मंत्री ने बैठक बुलाई थी। इस कारण मैं समय पर सदन में नहीं पहुंच सका।' परब ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पर निशाना साधा। परब ने कहा, 'विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भाजपा को बिना मांगे सरकार बनाने के लिए समर्थन का ऐलान कर दिया था। अब जब कभी शिवसेना और भाजपा के बीच तनाव होता है तो राष्ट्रावादी कांग्रेस इसी ताक में रहती है कि शिवसेना सत्ता से बाहर कब निकले। ताकि राष्ट्रवादी कांग्रेस को सत्ता में आने का मौका मिल जाए।' इसके जवाब में विपक्ष के नेता मुंडे ने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद शिवसेना विपक्ष में थी लेकिन भाजपा ने पांच कैबिनेट मंत्री पद दिया और शिवसेना सत्ता के आगे लाचार हो गई।

परिचारक को लेकर शिवसेना का हंगामा
सैनिकों के बारे में आपत्तिजनक बयान देने वाले विधायक प्रशांत परिचारक का निलंबन वापस लेने के मुद्दे पर मंगलवार को भी विपक्ष और शिवसेना ने विधानसभा हंगामा किया। कार्यवाही शुरू होते ही पूर्व मुख्यमंत्री विधायक पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सरकार को परिचारक के मुद्दे पर अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए। राकांपा के जयंत पाटील ने भी चव्हाण की मांग का समर्थन किया। शिवसेना ने भी परिचारक को बर्खास्त करने की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद विधानसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर शिवसेना के सुनील प्रभू ने परिचारक के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने और बर्खास्त करने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि यह ऊपरी सदन का मामला है। इस बाबत फैसला भी ऊपरी सदन को करना है। पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस, शिवसेना और राकांपा कि स्थिति साफ है, ऐसे में सरकार को अपना रुख साफ करना चाहिए।

इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि परिचारक का बयान निंदनीय है। किसी को इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए, लेकिन ऊपरी सदन में इस पर चर्चा और फैसला होगा इसके बाद विधानसभा में निवेदन दिया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा भूमिका स्पष्ट किए जाने का पृथ्वीराज चव्हाण ने स्वागत किया। वहीं जवाब से असंतुष्ट शिवसेना सदस्यों ने विधानसभा से वॉकआउट (बहिष्कार) कर दिया।