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महाराष्ट्र सरकार ने मानी मराठाओं की मांग, नवंबर तक आरक्षण देने का ऐलान

August 06th, 2018 12:03 IST

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मराठा आंदोलन के आगे महाराष्ट्र सरकार झुक गई है। राज्य सरकार ने नवंबर तक मराठा आरक्षण देने का ऐलान कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने रविवार को राज्य की जनता को टीवी पर संबोधित किया और कहा कि मराठा समाज को आरक्षण देने की राह में आने वाली हर अड़चन को नवंबर तक दूर कर लिया जाएगा। इसके बाद आरक्षण लागू हो जाएगा। सरकार ने राज्य में होने वाली 72 हजार भर्तियों पर भी फिलहाल रोक लगा दी है।

सीएम ने अपनी 15 मिनट की स्पीच में कहा कि महाराष्ट्र बैकवर्ड क्लास कमीशन (MSBCC) बॉम्बे हाईकोर्ट को 7 अगस्त को बताएगी कि वह मराठा कोटा से जुड़ी रिपोर्ट कब जमा करेगी। उन्होंने कहा कि जैसे ही MSBCC अपनी रिपोर्ट जमा करेगी उसके बाद राज्य विधायिका का एक विशेष सत्र समुदाय को आरक्षण देने के संबंध में "कानून या संकल्प" पारित करने के लिए एक महीने के अंदर बुलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि MSBCC एक वैधानिक बॉडी है और रिपोर्ट को जल्दी से जमा करने के लिए उसपर "दबाव" नहीं बनाया जा सकता है।

वहीं मराठा नेताओं ने इसे सीएम का अच्छा कदम बताया है, लेकिन उनका ये भी कहना है कि सरकार को इसके बारे में लिखित में देना चाहिए। साथ ही जिन आंदोलनकारियों पर मामले दर्ज हुए हैं, उनके मामले भी वापस लेने चाहिए। मालूम हो कि आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समाज ने उग्र आंदोलन किया था। कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई थी। कई लोगों को पुलिस ने इसके बाद गिरफ्तार किया था।

बता दें कि लंबे समय से मराठा समाज आरक्षण की मांग कर रहा था वहीं महाराष्ट्र सरकार ने पिछले महीने 72 हजार पदों पर भर्ती का ऐलान किया था। इसके लिए एक समिति गठित कर राज्य भर में परीक्षाएं आयोजित करने का खाका तैयार किया गया था। मराठा समाज की मांग थी कि जब तक मराठा समाज को आरक्षण नहीं मिलता तब तक सरकार मेगा भर्ती पर रोक लगाए। शुरुआत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने मराठा आंदोलकर्ताओं की इस मांग को ठुकरा दिया था। हालांकि अब इस मांग को स्वीकार कर लिया गया है।

राज्य सरकार के इस फैसले को चुनावी गुणाभाग से भी जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि महाराष्ट्र में मराठा समाज की 33 फीसदी आबादी है। 288 विधानसभा की 75 सीटों पर हार-जीत तय करने में इनकी बड़ी भूमिका होती है। बीजेपी इनकी नाराजगी मोल लेने का जोखिम नहीं उठाना चाहती। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में अभी मराठा आरक्षण का मुद्दा चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट ये कह चुका है कि 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण दिया नहीं जा सकता है। ऐसे में अब सरकार किस तरह ये आरक्षण देती है ये देखना होगा। 

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