फर्जी मामले की हो पहले जांच: एनसीबी से पकड़े गए पांच मामलों की जांच पर मलिक ने उठाए सवाल

December 3rd, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  महाराष्ट्र पुलिस की एंटी नार्कोटिक्स सेल (एएनसी) द्वारा राज्य में पकड़े गए ड्रग्स के पांच बड़े मामलों को केंद्र सरकार की जांच एजेंसी नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को सौंपे जाने से जुड़े पत्र को लेकर राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और राकांपा के प्रवक्ता नवाब मलिक ने सवाल उठाए हैं। मलिक ने शुक्रवार को सवाल किया कि क्या इस मामलों के जरिए ज्यादा उगाही की कोशिश की जाएगी। मलिक ने कहा कि एनसीबी के डायरेक्टर जनरल ने 24 नवंबर को महाराट्र के डीजी (पुलिस महानिदेशक) को एक पत्र लिखा जिसमें कहा गया है कि गृहमंत्री अमित शाह का निर्देश है कि एएनसी द्वारा पकड़े गए पांच सबसे बड़े मामले एनसीबी को सौंपा जाए। मलिक ने कहा कि बड़े मामलों का मानक क्या है।

दो ग्राम, तीन ग्राम या तीन टन या मामलों को मिला प्रचार होगा। राज्य सरकारों का अधिकार है वह अपने यूनिट के जरिए कार्रवाई करती है। ड्रग्स के खिलाफ एएनसी ने एनसीबी से ज्यादा कार्रवाइयां की हैं। अगर केंद्र की यूनिट है तो वह काम करे और काम नहीं कर पा रही है तो यूनिट बंद कर दें।  मलिक ने पूछा कि मामले हस्तांतरित करने की वजह क्या है। क्या राज्य सरकार का अधिकार खत्म करना चाहते हैं या एनसीबी में जो उगाही का धंधा चल रहा है उसे पांच मामलों के जरिए उसे और बढ़ाना है। हम अपना काम कर रहे हैं आप अपना काम करिए। मलिक ने कहा कि एनसीबी ने जो 26 फर्जी मामले दर्ज किए हैं उनकी जांच कब होगी। पकड़े गए निर्दोष लोगों को कब छोड़ा जाएगा। यह साफ है कि महाराष्ट्र में जोनल यूनिट उगाही का धंधा कर रही है। प्रायवेट आर्मी बनाई गई है। ऐसे में मामले हस्तांतरित करने की मांग क्यों की जा रही है केंद्र सरकार को इसका जवाब देना होगा।  बता दें कि एनसीबी के डीजी एसएन प्रधान ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को जो पत्र लिखा है उसमें ऐसे मामलों की जांच एनसीबी को सौंपने को कहा है जिनमें आरोपियों के तार दूसरे राज्यों या विदेशों से जुड़े हों जिससे ड्रग्स के नेटवर्क की जड़ तक पहुंचा जा सके।    


 

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