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फिर से "लाड़ली लक्ष्मी' योजना शुरू करने के महापौर ने दिए निर्देश दिए

फिर से "लाड़ली लक्ष्मी' योजना शुरू करने के महापौर ने दिए निर्देश दिए

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  गरीबी रेखा के नीचे बसर कर रहे परिवार की लड़कियों के लिए चलाई जाने वाली लाड़ली लक्ष्मी बीमा योजना बंद करने से मनपा की आमसभा में सदस्यों ने रोष व्यक्त किया। महापौर दयाशंकर तिवारी ने फिर से इस योजना को चालू करने के निर्देश दिए। तत्कालीन आयुक्त तुकाराम मुंढे ने इसे बंद कर दिया था।

प्रशासन से मांगा जवाब 
भाजपा प्रतोद दिव्या धुरडे ने मनपा की ऑनलाइन सभा में यह प्रश्न उपस्थित किया। उन्होंने इस योजना को बंद करने का प्रशासन से जवाब मांगा। प्रशासन की ओर से जवाब में बताया गया कि लाभार्थियों को कम आैर संबंधित एजेंसी का ज्यादा लाभ होने का हवाला देकर तत्कालीन आयुक्त ने योजना बंद कर दी। प्रशासन के जवाब से नगरसेवक और महापौर का समाधान नहीं हुआ। योजना का अध्ययन किए बिना योजना बंद किए जाने का आयुक्त राधाकृष्णन बी. ने कबूल किया। महापौर ने इसे पूर्ववत चालू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जब तक वैकल्पिक योजना को सदन की अनुमति नहीं मिलती, तब तक उसे तत्काल चालू रखें। 

वर्ष 2012 में शुरू की गई थी
विद्यमान महापौर वर्ष 2012 में स्थायी समिति सभापति थे। उन्हीं के कार्यकाल में यह योजना लाई गई थी। शुरुआत में 3 वर्ष के लिए योजना शुरू करने के प्रस्ताव को स्थायी समिति ने मंजूरी दी थी। इस योजना के लिए एजेंट नियुक्ति का प्रश्न भी हल किया गया। बजट में निधि का प्रावधान किया गया। लाभार्थियों का अच्छा प्रतिसाद मिला। 

ऐसी थी व्यवस्था
इस योजना में शून्य से 1 आयु की लड़कियों काे लाभ देने का तय हुआ। मनपा की ओर से पहली वार्षिक किस्त 3645 रुपए और आगे के 19 वर्ष तक वार्षिक किस्त 3579 दिया जाना था। लड़की के 20 वर्ष उम्र तक योजना की किस्त भरने का प्रावधान किया गया। 
आगे के पांच वर्ष किस्त भरने की आवश्यकता नहीं है। उम्र के 20 और 25 वर्ष बाद उसके खाते में 1 लाख, 98 हजार 750 रुपए जमा करने की योजना थी। योजना के अनुबंध में एजेंट को एक हजार रुपए प्रति लाभार्थी मिलना अपेक्षित है। 
अगस्त 2020 से योजना की किस्त नहीं भरे जाने पर बैठक में सदस्यों ने रोष व्यक्त किया। महापौर ने अब तक मनपा को प्राप्त आवेदनों का निपटारा कर लाभार्थियों को लाभ देने के निर्देश दिए।
 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।