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मेडिकल पीजी पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं जून में  

मेडिकल पीजी पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं जून में  

डिजिटल डेस्क,  नागपुर। नागपुर के मेयो, मेडिकल और लतामंगेशकर चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल समेत प्रदेश भर के चिकित्सा महाविद्यालयों में 12 मई से शुरु होने वाली पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यकमों की ग्रीष्मकालीन परीक्षा स्थगित कर दी गई है। महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय कुलगुरु डॉ.दिलीप म्हैसेकर ने यह घोषणा की है। विवि की ओर से जारी पत्रक के अनुसार ये परीक्षाएं अब 15 जून से ली जाएगी। इस में एमडी, एमएस डिप्लोमा, एम.एससी कोर्स जैसे पाठ्यक्रम शामिल है।

उल्लेखनीय है कि राज्य में कोरोना के बढ़ते प्रभाव के चलते सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी गई है। लेकिन मेडिकल पीजी पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं नहीं टाली गई थी। वहीं विविध अस्पतालों में जारी कोरोना मरीजों के इलाज में भी इन विद्यार्थियों की मदद ली जा रही है। इन्हीं कारणों से नागपुर समेत प्रदेश भर के विद्यार्थी विश्वविद्यालय से परीक्षाएं स्थगित करने की मांग कर रहे थे। विश्वविद्यालय ने परीक्षा स्थगित करने के साथ ही परीक्षा की नई तारीखें भी जारी की है। नए टाइम टेबल के अनुसार पीजी पाठ्यक्रमों का पेपर-1 15 जून को, पेपर-2 17 जून को, पेपर-3 19 जून और पेपर-4 22 जून को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक ली जागी। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ने सत्र 2 के लिए 5 मई तक परीक्षा फॉर्म भरने की महूलत दी है।

अफवाहों से बचने को कहा
यूनिवर्सिटी के अनुसार इन दिनों परीक्षाओं को लेकर सोशल मीडिया में कई अफवाहें जोरों पर है। विद्यार्थियों और पालकों को इन अफवाहों से बचने की अपील की गई है। केवल यूनिवर्सिटी की अधिकृत वेबसाट पर भरोसा करने को कहा गया है

घर पर टाइमपास नहीं, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर काम करेंगे शिक्षक
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश भर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के सभी पीजी विभाग और संलग्नित कॉलेज इस दौरान बंद है। लेकिन इस अवधि में शिक्षकों को घर पर बैठ कर टाइमपास नहीं बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर काम करना होगा। विश्वविद्यालय की ओर से जारी सर्कूलर में शिक्षकों को ये आदेश दिए गए है। इन्हें रिसर्च कार्य और अगले शैक्षणिक सत्र के लिए  पाठ्यक्रम तैयार करने को कहा गया है।  इधर विश्वविद्यालाय अनुदान आयोग (यूजीसी)ने लॉकडाऊन के समय में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर कैसे काम करना है, इसकी विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। शिक्षकों को 5 से 10 के समूह में बांटा गया है। इन सभी को अपने अपने घर से एक दूसरे पर फोन या इंटरनेट पर संपर्क में रहकर काम करना है। शिक्षकों को पाठ्यक्रम ऐसा तैयार करना है, जिससे शिक्षा प्रणाली के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटा जा सकें। यूजीसी ने शिक्षा को रोजगार उन्मुख, वर्तामान में प्रासंगिक और विद्यार्थियों को जिम्मेदार और मार्गदर्शक नागरिकों के रूप में तैयार करने वाली बनाने का लक्ष्य रखा है। शिक्षकों को इसी लाईन के तहत पाठ्यक्रम में संशोधन करने के निर्देश दिए गए है। इसके लिए जीवन कौशल, एलओसीएफ, केयर, स्ट्राईड जैसे यूजीसी के अन्य मॉड्यूल्स का रिफरेंस लेने को कहा गया है। 

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