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महाराष्ट्र के 23 प्लाज्मा थैरेपी की निगरानी नागपुर से

महाराष्ट्र के 23 प्लाज्मा थैरेपी की निगरानी नागपुर से

डिजिटल डेस्क, नागपुर। नागपुर के मेडिकल कॉलेज और मेयो अस्पताल सहित प्रदेश के 23 केंद्रों पर प्लाज्मा थैरेपी केंद्र की शुरुआत हो गई। इन सबकी निगरानी नागपुर से होगी। फिलहाल यहां के मेडिकल कॉलेज और मेयो अस्पताल सहित 17 केंद्रों पर अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं। शेष केंद्रों की सूची तैयार है। मुंबई से मुख्यमंत्री ने सभी केंद्रों का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने बाकायदा प्लाज्मा दान करने की प्रक्रिया को लाइव देखा। इस दौरान यहां मेडिकल के डीन डॉ. सजल मित्रा, अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे और उनकी टीम, मेयो में डीन डॉ. अजय केवलिया आदि परियोजना से जुड़े विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

यह है दावा...
सबसे बड़े प्लाज्मा थैरेपी ट्रायल नागपुर के मेयो और मेडिकल अस्पताल में
रिकवर लोगों के ब्लड प्लाज्मा को 500 से अधिक मरीजों को दिया जाएगा
यहां होने वाले परीक्षण का नतीजा देश में कोरोना इलाज का टर्निंग प्वाइंट साबित होगा

राज्यस्तरीय क्लीनिकल ट्रायल
मेडिकल कॉलेज और मेयो अस्पताल में राज्य स्तरीय क्लीनिकल ट्रायल (परीक्षण) शुरू हो गया है। इससे कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थैरेपी की क्षमता का आकलन किया जाएगा। परीक्षण के दौरान कोरोना से रिकवर हुए मरीजों के ब्लड प्लाज्मा को 500 से अधिक मरीजों को दिया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि यह देश का सबसे बड़ा ट्रायल है। इस ट्रायल के लिए राज्य सरकार ने 70 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है।

22 जून को ही आ गई थी मशीन 
प्लाज्मा थैरेपी केंद्रों की जिम्मेदारी नागपुर के कंधे पर है। शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय और अस्पताल के प्रोजेक्ट मैनेजर सहित अन्य अधिकारी पूरे राज्य मंे समन्वय कर रहे हैं। 22 जून को ही नागपुर में मशीन आ चुकी है। सोमवार दोपहर साढ़े बारह बजे शुभारंभ के बाद यहां के मेडिकल और मेयो दोनों अस्पतालों में एक-एक प्लाज्मा डोनेशन भी हुआ। मुख्यमंत्री ने प्लाज्मा बैंक, प्लाज्मा ट्रायल और इमरजेंसी ऑथराइजेशन सुविधा का भी उद्घाटन किया। डोनेशन की सुविधा रोज मिलेगी। इस खास परियोजना में जीएमसी के डीन डाॅ. सजल मित्रा और प्रिंसिपल इनवेस्टिगेटर डॉ. सुशांत मेश्राम सहित कई अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं

क्या है प्लाज्मा थेरेपी
हमारा खून चार चीजों से बना होता है। रेड ब्लड सेल, व्हाइट ब्लड सेल, प्लेट्लेट्स और प्लाज्मा। इसमें प्लाज्मा खून का तरल हिस्सा है। इसकी मदद से ही जरूरत पड़ने पर एंटीबॉडी बनती हैं। कोरोना अटैक के बाद शरीर वायरस से लड़ना शुरू करता है। यह लड़ाई एंटीबॉडी लड़ती है, जो प्लाज्मा की मदद से ही बनती हैं। अगर शरीर पर्याप्त एंटी बॉडी बना लेता है, तो कोरोना हार जाएगा। मरीज के ठीक होने के बाद भी एंटीबॉडी प्लाज्मा के साथ शरीर में रहती हैं, जिन्हें डोनेट किया जा सकता है

कैसे होता है इलाज
जिस मरीज को एक बार कोरोना का संक्रमण हो जाता है, वह जब ठीक होता है तो उसके शरीर में एंटीबॉडी विकसित होती है। यह एंटीबॉडी उसको ठीक होने में मदद करती है। ऐसे व्यक्ति से खून लेकर प्लाज्मा निकाला जाता है। प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी जब किसी दूसरे मरीज में डाली जाती है, तो बीमार मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है। बताया जाता है कि एक शख्स से निकाले गए प्लाज्मा की मदद से दो लोगों का इलाज संभव है। कोरोना निगेटिव आने के दो हफ्ते बाद वह प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। ऐसे रक्तदाताओं की सूची यहां भी तैयार की गई है।

क्या है पूरी प्रक्रिया
जो मरीज ठीक हो जाते हैं, उनके शरीर से ऐस्पेरेसिस तकनीक से खून निकाला जाता है। इसमें खून से प्लाज्मा जैसे अवयवों को निकालकर बाकी खून को फिर से उसी रोगी के शरीर में वापस डाल दिया जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, एंटीबॉडी खून के प्लाज्मा में मौजूद होता है, डोनर के शरीर से लगभग 800 मिलीलीटर प्लाज्मा लिया जाता है, इसका लगभग तीन से चार मरीजों में इस्तेमाल हो सकता ह

प्रतिदिन होगा दान
राज्य के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. मोहम्मद फैजल ने बताया कि सभी केंद्रों पर लगभग 15 से 16 डोनेशन किए गए हैं। इस कड़ी में नागपुर के मेयो और मेडिकल अस्पताल में भी एक-एक डोनेशन किए गए हैं। करीब 17 केंद्रों पर मशीनें पहुंच चुकी हैं। इसके आगे की भी सूची तैयार है। अब रोजाना डोनेशन होंगे।

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