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महावितरण की सुस्त चाल से नागपुर जोन में 600 करोड़ से ज्यादा बकाया

महावितरण की सुस्त चाल से नागपुर जोन में 600 करोड़ से ज्यादा बकाया

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  कोरोनाकाल (मार्च से अक्टूबर) में बिजली बिल वसूली में आई सुस्ती के कारण नागपुर जोन में उपभोक्ताओं पर 600 करोड़ से ज्यादा का बिल बकाया हो गया है। राज्य की बात करें तो 6867.3 करोड़ बिजली बिल बकाया है, जिसमें कृषि पंपों का बिल शामिल नहीं है। महावितरण ने 13 नवंबर को परिपत्रक जारी कर वसूली पर ध्यान देने का फरमान जारी किया है।

महावितरण की हालत खराब
मार्च से अक्टूबर तक बिजली बिल वसूली बेहद धीमी रही। कोरोना संक्रमण के कारण महावितरण ने भी बिल भरने के लिए किसी उपभोक्ता को मजबूर नहीं किया। महावितरण की हालत खराब हो गई है। कंपनी पहले कर्मचारियों को बोनस देने के पक्ष में नहीं थी आैर अब जब बोनस देना है तो निधि की सख्त जरूरत हैै। महावितरण के कार्यकारी संचालक (बिलिंग एण्ड रेवेन्यू) ने 13 नवंबर को परिपत्रक जारी कर बिल वसूली पर ध्यान देने को कहा। बिजली बिल भरने के लिए उपभोक्ताआें को प्रोत्साहित करने को कहा। हर अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र की वसूली पर नजर रखेगा आैर ज्यादा से ज्यादा बिजली वसूली का प्रयास करेगा। इसके लिए सम्मेलन लेने व एकमुश्त राशि भरने में असमर्थ उपभोक्ताआें के लिए किश्त की सुविधा दी जाए।

नागपुर विभाग में 13 सौ करोड़ बकाया 
नागपुर विभाग में नागपुर के अलावा वर्धा, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा व गडचिरोली जिला आता है। विभाग में नागपुर (नागपुर-वर्धा), भंडारा (भंडारा-गोंदिया) व चंद्रपुर (चंद्रपुर-गड़चिरोली) जोन है। विभाग में 13 करोड़ का बिजली बिल बकाया है, जबकि नागपुर जोन में 6 सौ करोड़ से ज्यादा। 

स्थायी रूप से बंद  
बार-बार सूचना व चेतावनी देने के बावजूद बिजली बिल नहीं भरने पर नागपुर समेत राज्य में हजारों लोगों के विद्युत आपूर्ति स्थायी रूप से बंद कर दी गई है। कोरोनाकाल के पहले स्थायी रूप से जिनकी बिजली काटी गई, उन पर महावितरण का 286.9 करोड़ रुपए का बिल बकाया है। 

परिपत्रक मिला है, वसूली पर काम होगा 
मुख्यालय से बिजली वसूली के संबंध में परिपत्रक आया है। उपभोक्ताआें को बिजली बिल भरने के लिए आगे आना चाहिए। परिपत्रक में जो सूचनाएं दी गई हैं, उस पर अमल करके बिजली बिल की वसूली की जाएगी।  बिल भरने की रफ्तार सुस्त है। सम्मेलन लेकर व चर्चा करके उपभोक्ताआें को बिल भरने के लिए प्रेरित किया जाएगा।  -अजित ईगतपुरीकर, पीआरओ, महावितरण, नागपुर
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।