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अवैध संबंधों के चलते महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा हत्याएं

अवैध संबंधों के चलते महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा हत्याएं

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अवैध संबंध और प्रेम संबंध देश में हत्याओं की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। साल 2019 में अवैध संबंधों के चलते महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 245 हत्याएं हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरों (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र में प्रेम संबंधों और अवैध संबंधों के चलते तीन सालों में 1119 लोगों की जान ले ली गई है। आंकड़ों के मुताबिक 2019 में अवैध संबंधों के चलते महाराष्ट्र में 245 लोगों की हत्याएं हुईं जो देश में सबसे ज्यादा है। इसके बाद तमिलनाडु का नंबर आता है जहां अवैध संबंधों के चलते 211 जिंदगियां खत्म हो गईं। मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है जहां अवैध संबंधों के चलते 169 लोगों की जान गई। देशभर में 2019 में अवैध संबंधों के चलते 1602 हत्याएं दर्ज की गईं।

प्रेम संबंध भी देश में हत्या की बड़ी वजहों में से एक हैं। 2019 में 1570 हत्याएं प्रेम संबंधों के चलते दर्ज की गईं। इस मामले में उत्तर प्रदेश की स्थिति सबसे खराब है जहां प्रेम संबंधों के चलते 385 हत्याएं की गईं। हत्या के 270 मामलों के साथ बिहार दूसरे नंबर पर जबकि 148 मामलों के साथ महाराष्ट्र प्रेम संबंधों के चलते होने वाले हत्या के मामलों में तीसरे नंबर पर है। साल 2019 में देश में हत्या की कुल 28 हजार 918 मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें से सबसे ज्यादा 9516 हत्याओं की वजह आपसी विवाद थे। इसके अलावा संपत्ति विवाद, पारिवारिक विवाद, निजी दुश्मनी भी हत्याओं की मुख्य वजहों में शामिल रहे। 

पैसों के विवाद में भी सबसे ज्यादा हत्याएं
साल 2019 में पैसों को लेकर विवाद में भी महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 209 हत्याएं हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश और बिहार का नंबर आता है जहां क्रमश: 149 और 143 हत्याएं पैसों के लेनदेन को लेकर हुईं। देशभर में सा 2019 में पैसों के विवाद में 1067 हत्याएं हुईं। 

बच्चों की हत्या भी राज्य में ज्यादा
बच्चों की हत्या के मामलों में भी साल 2019 में महाराष्ट्र अव्वल रहा और छह साल से कम उम्र के बच्चों की हत्या की सबसे ज्यादा 77 मामले महाराष्ट्र में दर्ज किए गए। इनमें से 43 लड़कियां जबकि 34 लड़के शामिल थे। छह से 12 साल की उम्र के बच्चों के हत्या के मामले में भी महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर रहा और यहां इस उम्र के 41 बच्चों की हत्या हुई। इस उम्र के सबसे ज्यादा 74 बच्चों की हत्या के मामले उत्तर प्रदेश में हुए। 12 से 16 साल की उम्र के भी 106 हत्याओं के साथ महाराष्ट्र ही सबसे आगे रहा। मध्य प्रदेश ऐसे 43 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर रहा।

राज्य में जानलेवा प्रेम और अवैध संबंध 

साल         प्रेम संबंध के चलते हत्या   अवैध संबंध के चलते हत्या
2019          123                           222
2018          125                           256
2017          148                           245

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।