comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

प्रेम संबंधों से जन्मे बच्चे पर मां का अधिकार अधिक : हाईकोर्ट

प्रेम संबंधों से जन्मे बच्चे पर मां का अधिकार अधिक : हाईकोर्ट

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रेम संबंध से जन्मी संतान को मानित पिता को सौंपने  से इंकार कर दिया है। साथ ही अदालत ने बच्चे को न्यूजीलैंड ले जाने का रास्ता भी साफ कर दिया है। न्यायमूर्ति एस गुप्ते ने अपने फैसले में स्प्ष्ट किया है कि प्रेम संबंध से पैदा होने वाली संतान के पिता को मानित जैविक पिता माना जाता है जबकि मां संतान की नैसर्गिक जन्मदाता होती हैं। कानूनन ऐसे संबंध से जन्म लेने वाली संतान पर मां का हक अधिक होता है।  मामला परेश पटेल व रूपा दुबे (परिवर्तित नाम) से जुड़ा है। दोनों की मुलाकात साल 2008 में हुई थी। पटेल पहले से शादीशुदा था और उसे पहले विवाह से एक बेटा भी था। फिर भी दोनों के संबंध कायम रहे। साल 2012 में रुपा ने एक बच्चे को जन्म दिया। कुछ समय तक सब ठीक चला। फिर दोनों में अनबन शुरु हो गई। इसके बाद रूपा ने अकेले बच्चे को पाला। इस बीच जब वह अपने सात साल के बच्चे को न्यूजीलैंड ले जाने लगी तो पटेल ने बच्चे की कस्टडी के लिए पुणे की पारिवारिक अदालत में आवेदन किया। पटेल के आवेदन को पारिवारिक अदालत ने खारिज कर दिया। 

पारिवारिक अदालत के निर्णय के खिलाफ पटेल ने हाईकोर्ट में अपील की। जिसमें दावा किया गया की उसकी साथी (रूपा) हिंसक व झगड़ालू स्वभाव की है। वह मानसिक व भावनात्मक रुप से बच्चे का पालन पोषण करने में सक्षम नहीं है। इसलिए अंतरिम रुप से बच्चे को उसे सौप दिया जाए। रूपा के वकील ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि जन्म से बच्चा उनके मुवक्किल के पास है। उनकी मुवक्किल व बेटा न्यूजीलैंड के नागरिक हैं। ऑटिज्म से ग्रसित बच्चे व उनके मुवक्किल को याचिकाकर्ता ने जन्म के बाद से अनाथ छोड़ दिया था। पुणे में कोरोना का प्रकोप अधिक है जबकि न्यूजीलैंड कोरोना मुक्त देश हैं। वहीं पर मेरी मुवक्किल अपने बेटे को पढ़ना भी चाहती हैं। इसलिए अब बच्चे की कस्टडी याचिकाकर्ता को न सौंपी जाए।

मामले से जुड़े तथ्यों पर गौर करने के बाद न्यायमूर्ति ने पाया कि याचिकाकर्ता जिस बच्चे की कस्टडी मांग रहे हैं वह वैवाहिक नहीं प्रेम संबंध से जन्मा है।याचिकर्ता ने रूपा के साथ अपने विवाह को स्वीकार नहीं किया है।ऐसे मामले में पिता संतान का मानित जैविक पिता होता है। जबकि मां को संतान का नैसर्गिक जन्मदाता माना जाता है। दो अपवादजनक स्थिति को छोड़कर ऐसे प्रकरण में संतान पर मां का हक अधिक होता है। न्यायमूर्ति ने बच्चे की मां की मानसिक स्थिति ठीक न होने की दलील को भी अस्वीकार कर दिया। मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर करने के बाद अदालत ने कहा कि हमे पारिवारिक अदालत के आदेश में कोई खामी नहीं नजर आती हैं और पटेल की याचिका को खारिज कर दिया। 
 

कमेंट करें
lpfHq
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।