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RTI का खुलासा : मुंबई के सरकारी आवास का मोह नहीं छोड़ पा रहे अधिकारी

November 05th, 2018 22:34 IST
RTI का खुलासा : मुंबई के सरकारी आवास का मोह नहीं छोड़ पा रहे अधिकारी

डिजिटल डेस्क, मुंबई। तबादले और केंद्र में प्रतिनियुक्त पर जाने के बावजूद सरकारी अधिकारियों का मायानगरी मुंबई से मोह नहीं छूटता। राज्य सरकार के 15 ऐसे अधिकारी हैं, जो स्थानांतरण के बाद भी सरकारी आवास खाली करने के लिए तैयार नहीं हैं। RTI कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र सरकार से सरकारी आवास को तय समय सीमा के बाद भी खाली न करने वाले अधिकारियों के बारे में जानकारी मांगी थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने गलगली को ऐसे 15 अफ़सरों की जानकारी दी है। जिसमें  12 आईएएस और 3 आईपीएस अफसर शामिल हैं। आईपीएस अधिकारी रश्मी शुक्ला का पुणे पुलिस कमिश्नर के पद पर तबादला होने के बाद भी उन्होंने मुंबई का सरकारी आवाल खाली नहीं किया था। 

RTI का खुलासा
अब उनकी फिर से मुंबई में ही नियुक्ति होने पर उनको वहीं आवास आवंटित कर दिया गया है, जिस पर पहले से कब्जा जमा रखा था। मुंबई महानगरपालिका में कार्यरत सुरेंद्र बागडे को सरकारी निवास आवास कब्जे में रखने की अनुमति दी हैं। केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ती पर भेजे गए विनीत अग्रवाल को केंद्र सरकार द्व्रारा सरकारी आवास उपलब्ध कराए जाने तक मुंबई के सरकारी आवास में रहने की अनुमति राज्य सरकार ने दी है। आएएस अधिकारी बलदेव सिंह भी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ती पर कार्यरत हैं और उन्हें मुंबई में मिला सरकारी आवास 31 मार्च 2019 तक कब्जे में रखने की अनुमति दी गई है। संजय चहांदे भी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ती पर गए हैं और इन्हें भी मुंबई के सरकारी आवास को कब्जे में रखने की अनुमति सरकार ने दी है।

आवास का मोह नहीं छोड़ पा रहे अधिकारी

रिटायर्ड होने के बाद भी सरकारी निवासस्थान खाली न करने वालों में जे पी डांगे और वी गिरीराज शामिल हैं। गिरीराज को 30 अप्रैल 2018 तक सरकारी निवासस्थान में रहने की अनुमति दी गई थी। रिटायर होने के बाद के पी बक्षी और दिलीप जाधव को महाराष्ट्र जलसंपत्ती नियमन प्राधिकरण अध्यक्ष और आपत्कालीन वैद्यकीय  सेवा प्रकल्प में पुनरर्नियुक्ति मिलने से उन्हें सरकारी आवास को कब्जे में रखने की अनुमति दी गई  है।

मुंबई से बाहर तबादले के बाद भी नहीं खाली किया सरकारी घर

मुंबई के बाहर तबादला होने के बाद भी 6 अफ़सरों ने सरकारी आवास खाली नहीं किया है। इनमें विजय सूर्यवंशी, अविनाश सुभेदार, कैलास शिंदे, किशोर राजे निंबालकर, राजेश देशमुख और मिलींद शंभरकर शामिल हैं। मिलींद शंभरकर को सरकारी आवास खाली करने के लिए 30 अप्रैल 2018 तक अवधि बढ़ाई गई थी। वहीं राजेश देशमुख को दिनांक 31 मई 2019 तक सरकारी आवास में रहने की अनुमति दी गई है।  

दंड में हुई है बढ़ोतरी

RTI कार्यकर्ता गलगली का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने गत 4 वर्ष में सेवानिवृत्त, प्रतिनियुक्ती और तबादले के बाद भी सरकारी आवास न छोड़नेवालों के लिए कड़ा नियम बनाकर जुर्माने की दर में वृद्धि की है। लेकिन दुर्भाग्य से हर बार सरकार ही ऐसे अफ़सरों पर मेहरबान दिखाई देती है। गलगली का कहना है कि सरकारी जमीन पर बनाई गई बिल्डिंग अथवा अन्य तरीकों से मकान करने वाले अधिकारी भी सरकारी आवाल पर कब्जा जमाने वालों में शामिल हैं। 
 

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