नागपुर: दीक्षाभूमि पर अनुयायियों की सुविधा के लिए मनपा सुसज्ज

October 14th, 2021

डिजिटल डेस्क, नागपुर। धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस निमित्त 14 और 15 अक्टूबर को दीक्षाभूमि पर कोविड के दिशा-निर्देशों का पालन कर कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में आने वाले बौद्ध अनुयायियों की सुविधा के लिए पीने का पानी, शौचालय और नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था की गई है। महापौर दयाशंकर तिवारी ने मनपा की सुविधाओं का उद्घाटन किया। अनुयायियाें से अपनी और दूसरों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दृष्टि से कोविड के नियमों का पालन करने का महापौर ने  आह्वान किया।
 
6 वैक्सीनेशन सेंटर :
दीक्षाभूमि पर आने वालों के लिए 6 वैक्सीनेशन सेंटर खोले गए हैं। अण्णाभाऊ साठे चौक स्थित नियंत्रण कक्ष, रहाटे कॉलोनी चौक, काच्छीपुरा चौक, बजाज नगर चौक, लक्ष्मी नगर चौक, नीरी मार्ग पर वैक्सीनेशन सेंटर खोले गए हैं। दीक्षाभूमि जाने वालों मार्गों पर अनुयायियाें को वैक्सीन प्रमाणपत्र दिखाने पर प्रवेश दिया जाएगा। जिन्होंने पहला डोज लेकर दूसरे डोज की कालावधि पूरी की है, उन्हें वैक्सीनेशन सेंटर पर दूसरा डोज देकर प्रवेश दिया जाएगा।

पहला डोज लगाने वालों की कोविड टेस्ट : कोविड प्रतिबंधक वैक्सीन के दोनों डोज लगाने वालों को दीक्षाभूमि में प्रवेश दिया जाएगा। जिन्होंने पहला डोज लगाया, दूसरा डोज लगाने का कालावधि पूरा होना बाकी है अथवा एक भी डोज नहीं लगाया, ऐसे व्यक्ति को पहला डोज लगाकर कोविड की एंटीजन टेस्ट की जाएगी। रिपाेर्ट निगेटिव आने पर उन्हें दीक्षाभूमि में प्रवेश दिया जाएगा। वैक्सीनेशन सेंटर पर एंटीजन टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। स्वास्थ्य जांच तथा औषधोपचार की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
 
100 नल, 500 शौचालय : महानगरपालिका की ओर से पीने के पानी की सुविधा के लिए 100 अस्थायी नल लगाए गए हैं। शासकीय आईटीआई छात्रावास की खुली जगह पर 500 अस्थायी शौचालयों की व्यवस्था की गई है।

पुलिस जवानों ने संभाला मोर्चा, प्रवेश के पहले होगी कोरोना जांच
 दीक्षाभूमि पर  करीब 2500 पुलिस जवानों ने मोर्चाबंदी संभाल ली। यहां आने वाले अनुयायियों को अंदर जाने से पहले जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा। बिना मास्क के किसी को प्रवेश  नहीं दिया जाएगा। अनुयायी की प्रवेश द्वार पर ही पुलिस की मौजूदगी में मनपा की टीम कोविड वैक्सीन के प्रमाणपत्र की जांच करेगी। दोनों वैक्सीन नहीं लेने वालों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों के लिए दीक्षाभूमि के पास ही पार्किंग की व्यवस्था किए जाने की जानकारी पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने दी है।

भदंत ससाई और डॉ. फुलझेले ने लिया व्यवस्था का जायजा
 65वें धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के उपलक्ष्य में दीक्षाभूमि परिसर पंचशील ध्वज और रोशनाई से जगमगा उठा है। इस बार दीक्षाभूमि पर धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस का मुख्य समारोह नहीं होगा, लेकिन कोरोना का प्रभाव कम होने और राज्य सरकार द्वारा धार्मिक स्थल शुरू करने की अनुमति देने से अनुयायियों की बड़ी संख्या में आना तय माना जा रहा है। इसके लिए दीक्षाभूमि के द्वार खोल दिए गए हैं। बौद्ध अनुयायी दीक्षाभूमि स्तूप के दर्शन कर सकेंगे। तैयारी की समीक्षा और निरीक्षण दीक्षाभूमि स्मारक समिति के अध्यक्ष भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई और सचिव डॉ. सुधीर फुलझेले ने बुधवार को दोपहर में किया। 

कोरोना संक्रमण को देखते हुए 65वें धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस का मुख्य समारोह रद्द कर दिया गया है, लेकिन दीक्षाभूमि की परंपरा को कायम रखा गया है। गुरुवार, 14 अक्टूबर को सुबह 9 बजे भिक्खु संघ और स्मारक समिति के पदाधिकारियों की उपस्थिति में पंचशील ध्वजारोहण होगा। 15 अक्टूबर को सुबह 9 बजे भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई की उपस्थिति में बुद्ध वंदना कर बाबासाहब को मानवंदना दी जाएगी। कार्यक्रम की तैयारी पूरी हो गई है। अंतिम निरीक्षण करने के लिए बुधवार को दोपहर में भदंत ससाई और डॉ. फुलझेले ने संपूर्ण दीक्षाभूमि परिसर, स्तूप, मुख्य प्रवेश द्वार और अन्य आवश्यक स्थानों का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया।
 

बेझनबाग में धम्म समारोह 
धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के उपलक्ष्य में बेझनबाग मैदान में धम्मदीक्षा समारोह आयोजन किया गया है। दीक्षाभूमि स्मारक समिति के अध्यक्ष व धम्मसेना नायक भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम होगा। इसके लिए बेझनबाग मैदान पर स्टेज को सजाया जा रहा है। मैदान परिसर में पंचशील ध्वज लगाए गए हैं। भिक्खु संघ के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है।
बाबासाहब ने आज के ही दिन ली थी दीक्षा : नागपुरवासियों के लिए 14 अक्टूबर का अपना महत्व है। डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को यानी आज के दिन दीक्षाभूमि पर बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी। इसलिए हर साल नागपुर के बौद्ध अनुयायी बड़ी संख्या में 14 अक्टूबर को दीक्षाभूमि के स्तूप को अभिवादन करने जाते हैं। गुरुवार से ही दीक्षाभूमि पर बौद्ध व आंबेडकरी अनुयायियों का सैलाब उमड़ने की संभावना जताई जा रही है।

 

 

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