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दिल्ली में बड़े नेताओं से नहीं मिल सके कांग्रेस के दोनों गुट

February 06th, 2019 15:32 IST
दिल्ली में बड़े नेताओं से नहीं मिल सके कांग्रेस के दोनों गुट

डिजिटल डेस्क, नागपुर। लोकसभा चुनाव के पहले अपनी जमीन तैयार करने मंगलवार को शहर कांग्रेस के दोनों गुट दिल्ली में थे। बहाना प्रियंका गांधी की राष्ट्रीय महासचिव पद पर नियुक्ति का स्वागत करने का रहा, लेकिन मकसद नेताओं से मुलाकात का था। हालांकि दोनों गुट के नेताओं की मंगलवार शाम तक दिल्ली के  किसी बड़े नेता से मुलाकात नहीं हो पाई थी। इस बीच ठाकरे समर्थकों ने दिल्ली में मुकुल वासनिक और अविनाश पांडे से मुलाकात कर अपनी बातों को साझा किया। राऊत समर्थकों की शाम तक किसी नेता से मुलाकात नहीं हो पाई थी।

चुनाव की दृष्टि से इस दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों गुटों का अपना-अपना एजेंडा है। ठाकरे समर्थक गुट इसके पहले दिल्ली का एक दौरा कर चुका है। नितीन राऊत समर्थक गुट सोमवार की शाम दिल्ली के लिए रवाना हुए, जिसमें गेव आवारी, तानाजी वनवे, अशोक धवड, विजय बाभरे, संजय दुबे समेत अनेक हैं। मंगलवार को इन नेताओं ने दिल्ली में प्रियंका गांधी की नियुक्ति का स्वागत व अभिनंदन किया। हालांकि शाम तक वे बड़े नेताओं से मुलाकात नहीं कर पाए।

चतुर्वेदी को वापस पार्टी में लाने की मांग
प्रियंका गांधी की ताजपोशी के कारण सभी अन्य बड़े नेता व्यस्त रहने के कारण उन्हें समय नहीं मिल पाया। राऊत समर्थक विलास मुत्तेमवार, विकास ठाकरे को उम्मीदवारी देने का विरोध कर रहे है। इनकी चुनाव से पहले सतीश चतुर्वेदी को वापस पार्टी में लाने की मांग भी  है। इन विषयों को नेताओं के सामने रखने की तैयारी है। सोमवार रात को यह टीम जैसे दिल्ली रवाना हुई, उसके तुरंत बाद ठाकरे गुट भी सक्रिय हो गया। ये भी दल-बल के साथ मंगलवार सुबह दिल्ली पहुंच गए। हालांकि इन्होंने भी प्रियंका गांधी की नियुक्ति का स्वागत करने के लिए दिल्ली पहुंचने की जानकारी दी। लेकिन दिन भर नेताओं से मुलाकात की कोशिशें जारी रहीं। दिल्ली में किसी बड़े नेता से मुलाकात तो नहीं हो पाई, किन्तु महासचिव मुकुल वासनिक और अविनाश पांडे से मुलाकात कर विविध विषयों पर चर्चा रही। इसका खुलासा नहीं हो पाया। लेकिन सतीश चतुर्वेदी की दोबारा कांग्रेस वापसी का विरोध और लोकसभा चुनाव में आशीष देशमुख, गेव आवारी, प्रफुल गुडधे, नितीन राऊत, नाना पटोले को नागपुर से उम्मीदवार देने का विरोध इनके एजेंडे पर प्रमुख रहने की जानकारी मिली। इन्होंने अपरोक्ष रूप से साफ किया कि अगर इनमें से किसी भी नेता को टिकट मिलती है, तो शहर कांग्रेस में असंतोष उभर सकता है। 
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।