दैनिक भास्कर हिंदी: मेयो, मेडिकल में ब्लड का सीमित स्टॉक बचा

April 3rd, 2021

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  कोराेना के चलते वैक्सीनेशन करवाने वाले दो महीने तक रक्तदान नहीं कर सकते हैं। इससे अस्पतालों में रक्त की कमी हो सकती है।  वैक्सीनेशन का पहला चरण प्रारंभ होने के बाद से रक्तदाताओं की संख्या में कमी आई है। इसके अलावा जैसे-जैसे कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे रक्तदाता कम होने लगे हैं। स्थिति यह है कि मेयो अस्पताल में अब केवल तीन दिन का स्टॉक बचा है, जबकि मेडिकल में मात्र दस दिन का स्टॉक है। रक्त संकलन न के बराबर हो रहा है।

रक्तदान पर हो रहा असर
कोरोना महामारी से बचाने के लिए 16 जनवरी से वैक्सीनेशन की शुुरुआत हुई। वैक्सीन लगवाने के बाद व्यक्ति रक्तदान नहीं कर सकता। दूसरा डोज 28 दिन बाद लेना पड़ता है। इस तरह दोनों डोज लेने के बाद दो महीने बीत जाते हैं। इन दो महीनों में रक्तदान नहीं किया जा सकता। एक अप्रैल से 45 वर्ष की उम्र पार कर चुके लोगों के लिए भी वैक्सीनेशन शुरू किया गया है। इसका असर भी रक्तदान पर होने लगा है। 

स्वेच्छा से देने वालों की कमी
फरवरी तक रक्त संकलन की स्थिति सामान्य थी। 10 मार्च से कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने से कोरोना काे लेकर डर पैदा हो चुका है। इसलिए रक्तदान करने के लिए लोग नहीं आ रहे। दूसरी ओर समाजसेवी संगठनों द्वारा भी शिविर नहीं लिए जा रहे हैं। मेडिकल अस्पताल द्वारा भी पिछले एक महीने में शिविर बंद हैं। स्वेच्छा से रक्तदान करने वाले भी नहीं आ रहे हैं।

चाहिए 15 से 20 यूनिट रक्त
 मेयो अस्पताल में हर रोज 15 से 20 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ रही है, जबकि प्रतिदिन केवल 2 या 3 ही रक्तदाता आ रहे हैं। शुक्रवार को केवल 55 यूनिट रक्त का स्टॉक था, जो तीन दिन तक चलने की संभावना है। फरवरी में हर रोज 100 यूनिट से अधिक स्टॉक हुआ करता था। 

3-4 ही आ रहे रोज  मेडिकल में हर दिन 3 या 4 ही रक्तदाता आ रहे हैं, जबकि यहां रोज 6-7 यूनिट रक्त की मांग है। शुक्रवार को यहां 63 यूनिट रक्त का स्टॉक था, जो मांग के हिसाब से आगामी 10 दिन तक चल सकता है। 

60%  मांग प्रसूति विभाग की  
रक्त की सर्वाधिक 60 फीसदी मांग प्रसूति विभाग की होती है। इसके अलावा आपात स्थिति व सर्जरी विभाग को रक्त की आवश्यकता होती है। सरकारी अस्पतालों में वर्तमान हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में रक्त की किल्लत महसूस हो सकती है। 
 

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