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नागपुर : घर में 10 घंटे पड़ा रहा संक्रमित का शव, पूरा परिवार काेरोना की चपेट में

नागपुर : घर में 10 घंटे पड़ा रहा संक्रमित का शव, पूरा परिवार काेरोना की चपेट में

डिजिटल डेस्क, नागपुर। रेशमबाग स्थित पुष्पांजलि अपार्टमेंट निवासी दंपति की मौत के मामले में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। 20 जुलाई को 66 वर्षीय बुजुर्ग की तबीयत खराब होने के बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों को बुजुर्ग के कोरोना संक्रमित होने का संदेह हुआ। फिर जांच की गई, जिसमें सोमवार रात को ही पॉजिटिव रिपोर्ट आई। तबीयत ज्यादा खराब होने पर वेंटिलेटर पर रखा गया। देर रात बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। 20 जुलाई को ही बुजुर्ग की 60 वर्षीय पत्नी की तबीयत बिगड़ी। उनमें कोरोना के लक्षण थे। फोन किया तो, दो घंटे बाद एंबुलेंस आई। तब तक वृद्धा की जान जा चुकी थी। बुजुर्ग महिला और उसके 39 वर्षीय बेटे का नमूना 20 जुलाई को ही लिया गया था। उसकी रिपोर्ट 21 जुलाई तड़के 3 बजे मिली। दोनों पॉजिटिव मिले। इसके बाद बहू और नातिन भी पॉजिटिव मिली है। बेटा, बहू और नातिन अस्पताल में भर्ती हैं।

वृद्धा की तबीयत बिगड़ी, दो घंटे बाद आई एंबुलेंस तब तक जान जा चुकी थी
महिला की तबीयत खराब होने पर मनपा को फोन किया गया। रात 10.30 बजे फोन करने के बाद एम्बुलेंस 12.30 के लगभग आई। तब तक महिला की मौत हो चुकी थी। एम्बुलेंस से महिला का शव नहीं ले जाया गया।

 21 जुलाई की सुबह 10.13 बजे तक वृद्धा का शव उसी हालत में घर में पड़ा रहा, जबकि तब तक उसके पॉजिटिव होने की जानकारी मिल चुकी थी।  शव को रैपिंग तक नहीं किया गया था। फिर निजी अस्पताल से 66 वर्षीय बुजुर्ग की मृत्यु की खबर आई। स्थानीय नगरसेवक डॉ. रवींद्र भोयर ने बताया कि उसी रात करीब 3.30 बजे महिला की रिपोर्ट आयी, जिसमें उसके पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। 

बच सकती थी मां की जान अचानक से माता-पिता की मौत से उनका 39 वर्षीय और पूरा परिवार सदमे में है। बेटे ने बताया कि रात 10.30 बजे मनपा को फोन करने के बाद भी एम्बुलेंस नहीं आई। मां को बहुत तकलीफ हो रही थी। लगभग 2 घंटे बाद मां की मौत हो गई। अगर समय पर एंबुलेंस आ गई होती तो मां बच जाती। 

बच्चे को देखने वाला कोई नहीं  बेटे की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया है। बहू और नातिन मेयो में भर्ती हैं। 4 वर्षीय नाती की रिपोर्ट निगेटिव है, लेकिन उसकी देखरेख करने के लिए कोई नहीं है। इसलिए उसे भी मां के साथ मेयो में रखा गया है।

बहुत बड़ी लापरवाही 
कोरोना के केस में लापरवाही हुई है। महानगरपालिका को अपडेट होना पड़ेगा। मैंने स्वयं महिला की तबीयत बिगड़ने पर फोन किया था, लेकिन 2 घंटे बाद एंबुलेंस आई। तब तक महिला की मृत्यु हो चुकी थी। रात भर शव घर में पड़ा रहा। पार्थिव के पास रात भर उनकी बहू, बेटा,  नातिन और एक नाती रहे। मैंने रात को कई अधिकारियो को इस संबंध में फोन भी किया, लेकिन कोई प्रतिसाद नहीं मिला। सुबह 10:30 बजे महिला के शरीर को डेथ शीट से रैप कर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।
-डॉ. रवींद्र भोयर, पार्षद

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