दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर यूनिवर्सिटी में 5 बड़े पदों पर फुलटाइम नियुक्ति शीघ्र, मिलेंगे नए डीन

February 6th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  नागपुर यूनिवर्सिटी ने अपने यहां अतिरिक्त प्रभार स्वरूप चल रहे पांच बड़े पदों पर फुलटाइम नियुक्ति करने का निर्णय लिया है। इसमें कुलसचिव समेत यूनिवर्सिटी की चार फैकल्टी के अधिष्ठाताओं के पद शामिल हैं। यूनिवर्सिटी कुलगुरु डॉ.सिद्धार्थविनायक काणे के अनुसार नियुक्तियों से जुड़ी सभी प्रारंभिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद विवि 8-10 दिनों के भीतर पदभर्ती के लिए विज्ञापन जारी करेगा। जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करके कामकाज को गति दी जाएगी। 

इसलिए दी गई अनुमति

बता दें कि यूनिवर्सिटी में लंबे समय से उक्त पद अतिरिक्त पदभार स्वरूप चल रहे हैं। 30 जून 2018 को कुलसचिव डॉ.पूरणचंद्र मेश्राम के सेवानिवृत्त होने के बाद से परीक्षा नियंत्रक डॉ.नीरज खटी कुलसचिव पद का प्रभार संभाल रहे हैं। इसी तरह नए विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के बाद चार फुलटाइम अधिष्ठाताओं के पद यूनिवर्सिटी में निर्मित हुए हैं। इसमें साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कामर्स एंड मैनेजमेंट, ह्यूमेनिटीज और इंटर डिसिप्लिनरी फैकल्टी का समावेश है। ऐसे में करीब ढाई साल बाद विवि में फुलटाइम अधिष्ठाताओं की नियुक्ति होगी। बीते दिसंबर में राज्य सरकार ने विवि को इन पदों पर नियुक्ति करने की अनुमति दी थी। अब विवि कुलगुरु ने इन पदों पर नियुक्ति का एलान किया है। 

'सवर्ण आरक्षण' का कागजों पर जिक्र तक नहीं

केंद्र सरकार द्वारा घोषित किए गए सवर्ण आरक्षण के बाद राज्य सरकार ने भी इसे अपने यहां लागू करने की घाेषणा की। नागपुर यूनिवर्सिटी और सम्बद्धित कॉलेजों में पदभर्ती होने जा रही है। लेकिन अब तक राज्य सरकार ने अधिकृत रूप से यूनिवर्सिटी में प्रस्तावित पदभर्ती में सवर्ण आरक्षण के लिए कोई सूचना नहीं निकाली है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि यूनिवर्सिटी में होने वाली 50 प्रतिशत पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया में सवर्ण आरक्षण शामिल नहीं होगा। यूनिवर्सिटी अपने पुराने रोस्टर के मुताबिक ही नियुक्तियां करने जा रहा है। 
 

बीच में आचार संहिता भी

नियमानुसार  यूनिवर्सिटी से यह प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार इसे मंजूरी देगी। इसके बाद जीआर निकलेगा। इसके बाद विज्ञापन निकाल कर आवेदन मंगाए जाएंगे, फिर परीक्षा या स्क्रूटनी के बाद साक्षात्कार और फिर उम्मीदवारों का चयन होगा। यह प्रक्रिया खासी लंबी है और इसमें कम से कम एक साल का समय लगेगा। लेकिन आने वाले समय में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव हैं। ऐसे में आचार संहिता में पदभर्ती प्रक्रिया रोक दी जाएगी। ऐसे में आचार संहिता लागू होने के पूर्व यह प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है।