दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर यूनिवर्सिटी ‘जीरो’, एनआईआरएफ मूल्यांकन ने खोली पोल

December 1st, 2020

डिजिटल डेस्क, नागपुर। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय मध्य भारत के सबसे प्राचीन विश्वविद्यालयों में से एक है। वर्ष 1923 में स्थापित इस विश्वविद्यालय से पिछले 97 वर्षों में एक से बढ़ कर एक दिग्गज पढ़ कर निकले हैं, लेकिन खराब नीतियों और प्रबंधन के चलते विश्वविद्यालय की स्थिति इतनी बुरी हो चली है कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने नागपुर विश्वविद्यालय को देश के टॉप 150 विश्वविद्यालयों में भी नहीं माना। यहां तक कि नागपुर विश्वविद्यालय को टॉप 150 से 200 विश्वविद्यालयों के समूह में आखिरी स्थान पर रखा है। हमने मानव संसाधन मंत्रालय नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क के मानकों पर नागपुर विवि का प्रदर्शन देखा, तो पता चला कि नागपुर विश्वविद्यालय गुणवत्ता के मामले में फिसड्डी संस्थान साबित हो रहा है। अनेक मामलों में तो नागपुर विवि के कई विभागों ने बिलकुल शून्य (जीरो) प्राप्त किए हैं। अनेक कॉलम में जीरो स्कोर के कारण एनआईआरएफ ने नागपुर विवि को कोई भी रैंक प्रदान न करके फिसड्डी शिक्षा संस्थानों की श्रेणी में डाल दिया। 

इंडस्ट्री ने भी विवि की विशेषज्ञता को नकारा, कंसल्टेशन नहीं लिया : जानकारी के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2018-19 में किसी भी बाहरी संस्था ने विवि के इंजीनियरिंग, फार्मेसी, लॉ या मैनेजमेंट से विशेषज्ञ सलाह नहीं ली है। यहां तक कई विभागों को तो पिछले वर्ष भी पुरस्कार या सम्मान नहीं मिला है। वहीं किसी संस्था या उद्योग ने नागपुर विवि को फंड देकर किसी विषय पर रिसर्च कराने में भी कोई विशेष रुचि नहीं ली है।

पेटेंट के मामले में फिसड्डी : मौजूदा समय में इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी का अत्याधिक महत्व है। ऐसे में विदेशों और देश भर में रिसर्च के पेटेंट पर अधिक जोर दिया जा रहा है। मगर नागपुर विश्वविद्यालय इस मामले में अन्य विश्वविद्यालयों की तुलना में जरा पीछे है। 95 वर्ष पुराने इस विश्वविद्यालय में मौजूदा समय में हजारों रिसर्च होती है, मगर पेटेंट को उंगलियों पर गिना जा सकता है। 

अवार्ड और सम्मान
नागपुर विश्वविद्यालय के चारों बड़े विभागों के शिक्षकों और विद्यार्थियों को पिछले एक वर्ष में मिले अवार्ड या सम्मान की संख्या भी अंगुलियों पर गिने जाने लायक है।