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17 वर्षों से सादिल अनुदान से वंचित है नागपुर जिला परिषद

17 वर्षों से सादिल अनुदान से वंचित है नागपुर जिला परिषद

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जिला परिषद स्कूलों को पिछले वर्ष 2002 से सादिल अनुदान नहीं मिल रहा है। सादिल अनुदान जिला परिषद स्कूलों के अधिकार की निधि है। इस निधि का उपयोग स्कूल में शैक्षणिक, भौतिक तथा दैनिक जरूरतों को पूरा करने पर खर्च किया जाता है। जिला परिषद प्रशासन द्वारा अनुदान निर्धारण करने में लापरवाही के चलते 17 साल से जिप स्कूलों काे सादिल अनुदान आवंटित नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नागपुर को खर्च की नई सूची का कोई फायदा नहीं
4 जून को जारी की गई नई सूची में स्कूल की इमारत व स्वच्छतागृहों की मरम्मत तथा देखभाल, व्यक्तिगत स्वच्छता सामग्री, पेयजल, बिजली बिल, इंटरनेट कनेक्शन, डिजिटाइजेशन सामग्री, इंटरनेट, स्टेशनरी, अाग प्रतिबंधक यंत्र, प्रथमोपचार बॉक्स आदि का समावेश है। नागपुर जिला परिषद को सादिल अनुदान नहीं मिलने से राज्य सरकार द्वारा जारी की गई खर्च की नई सूची का कोई फायदा  नहीं है।

इसलिए नहीं मिल रहा अनुदान
जिला परिषद के शिक्षा विभाग की ओर से अनुदान निर्धारण प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाता है। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद जिला परिषद को अनुदान भेजा जाता है। जिला परिषद प्राप्त अनुदान की 80 प्रतिशत रकम संबंधित स्कूलों को भेजता है। जिला परिषद प्रशासन ने वर्ष 2002 से अनुदान निर्धारण प्रस्ताव राज्य सरकार को नहीं भेजा। प्रस्ताव नहीं मिलने से राज्य सरकार ने नागपुर जिला परिषद स्कूल का सादिल अनुदान फ्रीज कर दिया है। इसे पुन: चालू करने के लिए जिला परिषद प्रशासन की ओर से कोई प्रयास भी नहीं किए गए। राज्य की अन्य जिला परिषदों का भी सादिल अनुदान बंद किया गया था। अनुदान निर्धारण कर पुन: अनुदान चालू करने के लिए लगातार पत्राचार करने पर कुछ जिला परिषदों का अनुदान चालू किया गया है।
 नागपुर जिला परिषद लापरवाही बरतने से अनुदान से वंचित है।

क्या है सादिल अनुदान
राज्य के शिक्षा विभाग ने 14 नवंबर 1994 को एक शासन निर्णय निर्गमित किया था। शासन निर्णय के अनुसार शिक्षकों के वेतन के 4 प्रतिशत सादिल अनुदान स्कूलों को मंजूर किया गया। इसमें से 20 प्रतिशत रकम जिला परिषद स्तर और 80 प्रतिशत रकम स्कूलों को भुगतान की जाती है। यह अनुदान 127 मदों पर खर्च करने की एक सूची जारी की गई थी। इसमें खर्च के 8 मद बढ़ाकर 135 मदों की नई सूची जारी की गई। कोरोना संक्रमण के चलते राज्य सरकार ने पुरानी सूची रद्द कर चालू वित्त वर्ष में खर्च में कटौती करने का निर्णय लेकर 8 मदों पर खर्च करने की सूची जारी की है।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।