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फिल्म ‘अंबू’ में नागपुर के कलाकारों को अवसर, मार्मिक है कहानी

फिल्म ‘अंबू’ में नागपुर के कलाकारों को अवसर, मार्मिक है कहानी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। दृढ़ निश्चय व सकारात्मक दृष्टिकोण इंसान को कामयाबी के पथ पर आगे ले जाता है। ऐसे ही एक व्यक्ति हैं अम्बेश यादव, जो शारीरिक रूप से कमजोर होने के बावजूद पूरी हिम्मत के साथ जीवन में अपने हर काम को अंजाम तक पहुंचाते हैं। मूलत: भदोही उत्तर प्रदेश के निवासी अम्बेश ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ आर्ट्स में स्नातक की डिग्री हासिल की है। उसके बाद नागपुर आए और उन्होंने यहीं से अपना फिल्मी करियर शुरुआत की। अम्बेश यादव ने 2010 में पहली फिल्म "काली दुल्हन' बनाई, जो दहेज प्रथा पर आधारित थी। उसके बाद 2016 में जाति प्रथा पर आधारित सामाजिक फिल्म "गंगेश्वरी' बनाई, जो खूब सराही गई।

मार्मिक होगा चित्रण

अम्बेस की तीसरी हिंदी फिल्म "अम्बू' का मुहूर्त किया गया। "अम्बू' में एक दिव्यांग के जीवन संघर्ष का मार्मिक चित्रण होगा। फिल्म के निर्माता निर्देशक अम्बेश यादव, सह निर्माता जसवंत विश्वकर्मा, प्रवेश मंडल, कैमरामैन शिवा चौधरी, लेखक विंध्या शुक्ला, गीतकार आतिश जौनपुरी, रूस्तम घायल और नज़र महौरसवी, संगीतकार अमरेश शाहबादी एवं कोरियोग्राफर ज्ञान सिंह हैं। फिल्म मेें मुख्य भूमिका में कुणाल सिंह, अनूप अरोड़ा, रमेश गोयल, अजीत यादव, अभय यादव, हौसला यादव व अमित पाठक मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म में अधिकांश कलाकार शहर से लिए गए हैं।

बापू की जयंती पर स्कूलों में होंगे कार्यक्रम

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की ओर से महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में साल भर कार्यक्रम किए जाएंगे। इसके लिए बोर्ड ने नवंबर से अक्टूबर 2020 तक विभिन्न कल्चरल प्रोग्राम कराने की प्लानिंग की है। इसके तहत बोर्ड ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर थीमवाइज कैलेंडर जारी किया है। इसके हिसाब से स्टूडेंट्स क्लीनलीनेस ड्राइव से लेकर इस थीम पर परिचर्चा करेंगे, वहीं टीचर्स का उन्हें पूरा सपोर्ट मिलेगा। इस एक्टिविटी कैलेंडर के हिसाब से स्कूलों को अपने कैंपस में कार्यक्रम का आयोजन कराना होगा। उसके हिसाब से उन्हें एक रिपोर्ट तैयार करनी होगी और बोर्ड को हर महीने के अंत में भेजना होगा।


इस प्रकार रहेगा कैलेंडर

नवंबर : इसमें समाजसेवा थीम पर क्लीनलीनेस ड्राइव, वस्त्र वितरण, वृद्धाश्रम भ्रमण, अनाथाश्रम और स्पेशल होम्स की विजिट होगी।
दिसंबर : हेल्थ एंड फिजिकल फिटनेस थीम पर छात्र पदयात्रा, सात्विक आहार अभियान, जंक फूड के विरोध में कैंपेन और योगा आदि गतिविधियां होंगी।
जनवरी : एकता थीम पर प्रार्थना सभा, स्किट और नाटक का मंचन किया जाएगा।
फरवरी : स्वदेशी थीम पर स्टूडेंट्स खादी को प्रमोट करेंगे। साथ ही स्वदेशी वस्तुओं के लिए एक्टिविटी करेंगे।
मार्च : सच्चाई थीम पर निबंध, कविता आदि प्रतियोगितएं हाेंगी। टीचर्स के व्याख्यान होंगे।
अप्रैल : महिला सशक्तिकरण पर स्किट का आयोजन, टीचर्स क्लास लेंगे।
मई : हैंड राइटिंग स्पर्धा होगी और छात्रों में हैंड राइटिंग सुधारने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
जून : पशु-पक्षियों और पौधों के लिए प्रेम व विनम्रता थीम पर गतिविधियां होंगी। पौधरोपण किया जाएगा।
जुलाई : बाल संसद का आयोजन, मौलिक कर्तव्य विषय पर लेक्चर होंगे।
अगस्त : छात्र श्रमदान करेंगे और स्कूलों को स्वच्छ बनाने के लिए अभियान चलाएंगे।
सितंबर : प्रकृति संरक्षण थीम पर स्कूल गार्डन में पौधे लगाए जाएंगे।
अक्टूबर : महात्मा गांधी पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।