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महाराष्ट्र और तेलंगाना के 14 गांव के 5 हजार लोगों के नाम दो राज्यों की वोटर लिस्ट में , दोनों जगह करते हैं मतदान

महाराष्ट्र और तेलंगाना के 14 गांव के 5 हजार लोगों के नाम दो राज्यों की वोटर लिस्ट में , दोनों जगह करते हैं मतदान

डिजिटल डेस्क, चंद्रपुर। मतदाताओं को दो राज्यों में मतदान की अनुमति है यहां। सुनकर आश्चर्य भले हो, लेकिन  महाराष्ट्र और तेलंगाना सीमा पर बसे 14 गांवों में ये हकीकत है। इन गांवों के 5000 मतदाता दोनों राज्यों में मतदान करते हैं। उनके नाम दोनों राज्यों की मतदाता सूची में हैं। दोनों राज्यों ने उन्हें अपना मतदाता बताते हुए वोटर आई-डी कार्ड भी जारी किया है।

अपने-अपने हिस्से में मतदान करवाने के लिए दोनों राज्य सारे नियम ताक पर रख देते हैं। महाराष्ट्र की चंद्रपुर और तेलंगाना की आदिलाबाद लोकसभा सीट के प्रत्याशी अपना-अपना प्रचार करने भी गांव में आ रहे हैं। सामान्यत: एक मतदाता एक ही जगह मतदान कर सकता है।दो जगह नाम होना और वोट डालना अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन सब जानते हुए भी कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।
 
मजे की बात तो यह है कि दोनों राज्यों के अफसर भी गांव में आकर अपने-अपने राज्य में मतदान करने को कह रहे हैं। हालांकि इस बार 11 अप्रैल को ही दोनों राज्यों की इन सीटों पर मतदान होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मतदाता दोनों राज्यों में वोट डालने के लिए नए-नए रास्ते निकालने में लगे हुए हैं। 

दोनों राज्यों में मतदान करने वाले गांव
तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा पर बसे इन 14 गांवों के नाम हैं- मुकादमगुडा, परमडोली, परमडोली (तांडा), कोठा, लेंडीजाला, महाराजगुडा, शंकरलोधी, पद्मावती, अंतापुर, इंदिरानगर, येसापुर, पलसगुडा, भोलापठार और लेंडीगुडा।

आमने-सामने मतदान की व्यवस्था 
मतदान के समय दोनों राज्य अपने-अपने बनाए स्कूलों में ग्रामीणों को मतदान करने की सुविधा देते हैं। इस बार भी एक ही तारीख को मतदान करवाने के लिए स्कूलों में तैयारियां शुरू कर दी है।

पंचायत एक, सरपंच दो
इन 14 गांवों से संबंधित पांच पंचायतें हैं, लेकिन प्रत्येक पंचायत में दो-दो सरपंच हैं। एक तेलंगाना का, तो दूसरा महाराष्ट्र का जबकि सदस्य और ग्रामीण सब एक ही जगह के हैं। दोनों राज्य उन्हें पंचायत की अलग-अलग निधि भी उपलब्ध करवाते हैं। सामान्यत: महाराष्ट्र सरकार पंचायत को करीब 5 लाख, तो तेलंगाना सरकार 6 लाख रुपए की निधि देती है। 

हमारे बस की बात नहीं
8 दो जगह मतदान करना गैर-कानूनी है, लेकिन सीमा के उन गांवों को रोक पाना या उनसे संबंधित सवाल पर जवाब देना मेरे बस की बात नहीं। अच्छा है यह सवाल वरिष्ठ स्तर पर ही करें। मैं जवाब नहीं दे पाऊंगा।
-प्रशांत बेडसे, तहसीलदार

सालों से है समस्या
दो जगह वोट देना गैर-कानूनी है।  यह सालों से चली आ रही बड़ी समस्या है। इसके लिए हम लगातार तेलंगाना के वरिष्ठ अफसरों से बात कर रहे हैं। संबंधित गांव महाराष्ट्र का हिस्सा हैं। मुझे उम्मीद है इस बात का कोई हल निकलेगा।
-डॉ. कुणाल खेमनार, कलेक्टर, चंद्रपुर

 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।