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कांग्रेस को झटका, पुडुचेरी में नारायणसामी की सरकार गिरी, बोले- भाजपा लोकतांत्रिक व्यवस्था को पटरी से उतारने का काम कर रही

कांग्रेस को झटका, पुडुचेरी में नारायणसामी की सरकार गिरी, बोले- भाजपा लोकतांत्रिक व्यवस्था को पटरी से उतारने का काम कर रही

डिजिटल डेस्क, पुडुचेरी। साल 2021 में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को आज (सोमवार) बड़ा झटका लगा है। पुडुचेरी विधानसभा में कांग्रेस अपना बहुमत साबित नहीं कर पाई है। स्पीकर ने ऐलान किया कि सरकार के पास बहुमत नहीं है। पुडुचेरी की विधासभा में सोमवार को खासी नाटकीय स्थिति देखने को मिली। फ्लोर टेस्ट के पहले पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी.नारायणसामी और सत्तारूढ़ सरकार के विधायकों ने सदन से वॉक आउट कर दिया। वॉक आउट करने से पहले नारायणसामी ने केंद्र पर विपक्ष के साथ मिलीभगत कर उनकी सरकार गिराने का आरोप लगाया। साथ ही अपने 3 नॉमिनेटेड विधायकों के मतदान करने के अधिकार को लेकर भी उन्होंने बहस की।

फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, भाजपा भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को पटरी से उतारने का काम कर रही है। पुडुचेरी में जो हो रहा है वह राजनीतिक वेश्यावृत्ति है, लेकिन जीत सच्चाई की होगी। इतना ही नहीं नारायणसामी ने पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी और केंद्र पर विपक्ष के साथ मिलकर उनकी सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया। बात दें कि पिछले 1 महीने में उनकी सरकार के 6 विधायकों द्वारा इस्तीफा देने के बाद नारायणसामी की सरकार अल्पमत में आ गई थी। इन विधायकों को लेकर उन्होंने कहा था कि इस्तीफा देने वाले विधायक लोगों का सामना नहीं कर पाएंगे क्योंकि लोग उन्हें अवसरवादी कहेंगे।

उन्होंने कहा, हमारे विधायक एकजुट रहे और हम बीते 5 साल में हमने अच्छे से सरकार भी चलाई लेकिन हमारे अनुरोध के बाद भी केंद्र ने हमें फंड न देकर पुडुचेरी के लोगों को धोखा दिया है।

मुख्यमंत्री ने यह दावा भी किया कि केंद्र शासित प्रदेश के लोग कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के साथ हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि द्रमुक और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने के बाद गठबंधन ने सभी उपचुनाव भी जीते। नारायणसामी ने कहा, लोगों ने हम पर भरोसा किया था तभी उन्होंने हमें चुना था लेकिन जीतने में नाकाम रहा विपक्ष सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि तेलंगाना के राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने 18 फरवरी को पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद मुख्यमंत्री को विधानसभा में बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद रविवार को 2 और विधायकों द्वारा इस्तीफा देने के बाद सत्तारू ढ़ गठबंधन की 30 सदस्यीय विधानसभा में संख्या केवल 12 बची थी।

गौरतलब है कि विधानसभा में कांग्रेस के पास उसके 9 विधायकों के अलावा  2 डीएमके और एक निर्दलीय विधायक का समर्थन है। यानी कांग्रेस के पास 11 विधायकों (स्पीकर को लेकर 12) का समर्थन है, जबकि विधानसभा की वर्तमान स्थिति के मुताबिक उसे बहुमत के लिए 14 विधायकों का समर्थन चाहिए. हालांकि, फ्लोर टेस्ट से पहले मुख्यमंत्री नारायणसामी दावा करते रहे कि उनके पास निर्वाचित विधायकों में से बहुमत है। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।