गिरफ्तारी के पहले ही देशमुख ने दे दिया था इस्तीफा : मंत्री पद पर रहते गिरफ्तार होने वाले पहले शख्स हैं नवाब मलिक

February 23rd, 2022

डिजिटल डेस्क, मुंबई। राज्य के कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक महाराष्ट्र में मंत्री पद पर रहते गिरफ्तार होने वाले पहले शख्स हैं। इसके पहले गिरफ्तार राकांपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख ने गिरफ्तारी के 9 महिने पहले ही मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 5 अप्रैल 2021 को बांबे हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई जांच की अनुमति दिए जाने के बाद देशमुख ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। लेकिन मलिक को ईडी ने ऐसा मौका नहीं दिया। हालांकि हाल ही में केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में नाशिक पुलिस ने गिरफ्तार किया था पर उन्हें कुछ घंटों में जमानत मिल गई थी।

भ्रष्टाचार के आरोप में कुर्सी गवाने में आगे हैं राकांपा नेता 
ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद नवाब मलिक पर भी इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है। इससे भ्रष्टाचार के आरोपों में कुर्सी गंवाने वाले राकांपा नेताओं की सूची थोड़ी और लंबी हो जाएगी। राज्य में भ्रष्टाचार के आरोप में सबसे ज्यादा राकांपा के ही मंत्रियों को ही इस्तीफा देना पड़ा है। तीन पार्टियों की मौजूदा महाविकास आघाड़ी सरकार में भ्रष्टाचार के आरोप में इस्तीफा देने वाले देशमुख पहले मंत्री थे। राकांपा में दागदार नेताओं की फेहरिस्त काफी लंबी है। साल 2003 में समाजसेवी अन्ना हजारे चार तत्कालिन मंत्रियों नवाब मलिक, सुरेश दादा जैन, विजय कुमार गावित और पद्मसिंह पाटील के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए अनशन पर बैठ गए थे। इसके बाद जांच आयोग का गठन किया गया और नवाब मलिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जांच आयोग की रिपोर्ट आने और आरोप तय होने के बाद सुरेश जैन को कुर्सी छोड़नी पड़ी। 

 राकांपा प्रमुख शरद पवार खुद महाराष्ट्र 25 हजार करोड़ रुपए के राज्य कोआपरेटिव बैंक (एमएससीबी) घोटाला मामले में भतीजे अजित पवार के साथ मनी लांडरिंग के आरोपों का सामना कर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले ईडी ने पवार को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन पार्टी को इसका फायदा मिला और सहानुभूति के चलते उसके मतदाता एकजुट हो गए। राज्य के मौजूदा मंत्री खाद्य आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल और उनके भतीजे व पूर्व सांसद समीर भुजबल को भी मनी लांडरिंग के आरोप में लंबा समय सलाखों के पीछे बिताना पड़ा है। तेलगी घोटाले, महाराष्ट्र सदन घोटाले, पीडब्ल्यूडी के ठेके में गड़बड़ी जैसे कई आरोपों में घिरे भुजबल को एसआईटी की पूछताछ के बाद कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। साल 2017 में ईडी ने भुजबल की 20 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति जब्त कर ली थी। राज्य की राजनीति को हिलाकर रख देने वाले 70 हजार करोड़ रुपए के सिंचाई घोटाले में भी अजित पवार मामले के मुख्य आरोपी के रुप में देखे जाते हैं। हालांकि मामले की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पिछले साल अदालत को बताया था कि इनमें से 9 मामलों में उसे अजित पवार के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं जिन्हें बंद करने का फैसला किया गया है।

राकांपा के तीन गृहमंत्रियों ने गंवाई कुर्सी
राकांपा के तीन गृहमंत्री अब तक अपनी कुर्सी गंवा चुके हैं। इनमें से एक आर आर पाटील को 26/11 के मुंबई हमलों के बाद दिए गए अपने बयान के चलते कुर्सी गंवानी पड़ी थी। जबकि छगन भुजबल और अनिल देशमुख को भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद अपना पद छोड़ना पड़ा है।

कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्रियों की जा चुकी है कुर्सी 
भ्रष्टाचार के आरोप सत्ताधारी नेताओं पर लगते रहे हैं लेकिन जैसा विवाद आदर्श हाऊसिंग सोसायटी घोटाले को लेकर हुआ था वैसा शायद ही किसी मामले में हुआ है। कारगिल के शहीदों की विधवाओं के लिए बनाए जा रहे कथित घर को हड़पने के आरोपों के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था। कांग्रेस के एक अन्य मुख्यमंत्री शिवाजीराव पाटील निलंगेकर को भी मार्च 1986 में मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। उन पर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज की परीक्षा में बेटी के अंक बढ़वाने के आरोप लगे थे। राज्य के आठवें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले अब्दुल रहमान अंतुले को भी सीमेंट घोटाले के आरोप में जनवरी 1982 में कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। बाक्स..  

मलिक के गले लग रो पड़ी बेटी
ईडी द्वारा मंत्री नवाब मलिक की गिरफ्तारी के बाद उनके बेटी निलोफर मलिक अपने पिता के गले लग कर रो पड़ी। इसके पहले एनसीबी ने निलोफर के पति समीर खान को ड्रग्स मामले में गिरफ्तार किया था।  
 

खबरें और भी हैं...