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लापरवाही : क्वारेंटाइन सेंटर में लगाई रिटायर्ड, बीमार और उम्रदराज लोगों की ड्यूटी

लापरवाही : क्वारेंटाइन सेंटर में लगाई रिटायर्ड, बीमार और उम्रदराज लोगों की ड्यूटी

डिजिटल डेस्क,नागपुर। क्वारेंटाइन सेंटर में रिटायर्ड, बीमार और उम्रदराज लोगों की ड्यूटी लगाने से प्रशासकीय कार्यप्रणाली पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।  कोरोना की रोकथाम को लेकर सक्रियता दिखाने वाली सरकारी मशीनरी ने 5 माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारी की ड्यूटी क्वारेंटाइन सेंटर में लगा दी। एक अन्य ऐसे कर्मचारी को ड्यूटी करने का फरमान जारी किया गया है, जो पिछले 2 माह से विदर्भ के बाहर फंसा है। उम्रदराज और बीमार कर्मचारियों का भी ख्याल नहीं रखा गया। बिना जांचे-परखे ही जिला प्रशासन के स्तर से ड्यूटी लगाने का यह उदाहरण भर है। दरअसल, इतने गंभीर मामले में भी प्रशासन के अधिकारियों ने सूची को अपडेट करने की जरूरत नहीं समझी। चुनाव के समय जो सूची विभिन्न विभागों के स्तर से मुहैया कराई गई थी, उसी में से नाम लिए और ड्यूटी लगा दी।

NIT की लिस्ट को अपडेट नहीं किया गया
चुनाव के समय नासुप्र की ओर से कर्मचारियों का ब्योरा भेजा गया था। उसी सूची को उठाकर जिला प्रशासन ने ड्यूटी लगा दी। सूची को अपडेट करने की जहमत नहीं उठाई गई। इसकी वजह से इतनी बड़ी लापरवाही हुई है। 

ज्यादा  नहीं बोल सकते
जिला प्रशासन से हमें पुरानी सूची प्राप्त हुई। उन्होंने नई सूची मांगी नहीं आैर हमने भी नई सूची उन्हें भेजी नहीं। चुनाव के दौरान हमने यह सूची भेजी थी। इस बारे में हम ज्यादा नहीं बोल सकते।  -योगीराज अवदूत, स्थापना अधिकारी, नासुप्र, नागपुर

पुरानी लिस्ट ही भेज दी गई
काम की व्यस्तता के कारण पुरानी सूची ही  (चुनाव के दौरान मिली) नासुप्र को भेजकर संबंधित कर्मचारियों को क्वारेंटाइन सेंटर में नियुक्त करने का आदेश दिया था। नासुप्र प्रशासन अगर रिटायर्ड व लॉकडाउन में फंसे कर्मचारी की जानकारी देता तो उन लोगों का नाम सूची से हटा दिया जाता। हमारे पास कर्मचारी के आयु की जानकारी नहीं होती। ज्यादा आयुवाले कर्मचारी को क्वारंेटाइन सेंटर में लगाने से बचा जा सकता है। जल्दबाजी में अगर थोड़ी गलती हुई, तो संबंधित विभाग उसमें सुधार करके हमें जानकारी दे सकता था।   -निलेश काले, अधीक्षक व स्थापना अधिकारी, जिलाधिकारी कार्यालय, नागपुर.

नासुप्र से मांगे 21 कर्मचारी
जिला प्रशासन ने पांचपावली क्वारेंटाइन सेंटर में निगरानी के लिए नागपुर सुधार प्रन्यास (नासुप्र) से 21 कर्मचारी मांगे थे। निर्देश था कि ये कर्मचारी 29 मई से क्वारेंटाइन सेंटर में हाजिर होंगे। यह निर्देश जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दिया था। कर्मचारियों की पूरी सूची जिला प्रशासन ने नासुप्र को भेज दी थी। खास बात यह रही कि इस सूची में  मुरलीधर इंगले का नाम शामिल है। इंगले दिसंबर 2019 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसी तरह, चंद्रभान कंगाणे का नाम भी सूची में है। कंगाणे पिछले 2 माह से विदर्भ से बाहर फंसे हुए हैं। लॉकडाउन के कारण वह नागपुर नहीं आ पा रहे हैं। 

बीमार और ज्यादा उम्र के कर्मचारियों का भी ख्याल नहीं
ड्यूटी लगाने से पहले कर्मचारियों की उम्र और स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए। इस पक्ष को भी नजरअंदाज किया गया। एक ओर पुलिस विभाग ने ज्यादा उम्र व अस्वस्थ सिपाहियों को फील्ड ड्यूटी से दूर रखा है। दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने सामान्य विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने से पहले इस पर गौर नहीं किया। ऐसे लोगों की ड्यूटी लगाई गई है, जिनकी सेवानिवृत्ति में एक-दो साल बचे हैं। जिला प्रशासन सूची में सुधार कर लेता तो यह नौबत नहीं आती। नासुप्र के कर्मचारी अोमप्रकाश चुटे ने बीमारी का हवाला दिया है। वह अस्थमा से पीड़ित हैं। उन्होंने नासुप्र और जिला प्रशासन से अपनी ड्यूटी कटवाने की गुजारिश की है। 

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