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लोणार सरोवर के विकास के लिए नई समिति, जिलाधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी

लोणार सरोवर के विकास के लिए नई समिति, जिलाधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने बुलढाणा जिले के लोणार सरोवर के विकास के प्रति प्रशासनिक लापरवाही को देखते हुए एक नई समिति का गठन करके उसे विकासकार्य की मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस समिति में अभी केवल बुलढाणा जिलाधिकारी की नियुक्ति की गई है। लोणार विकास का कोई भी काम किसी भी विभाग से संबंधित हो, जिलाधिकारी को ही इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

हाईकोर्ट ने यह फैसला तब लिया जब  याचिकाकर्ता कीर्ति निपाणकर के अधिवक्ता आनंद परचुरे ने कोर्ट में  दलील दी कि यह याचिका बीते अनेक वर्षों से लंबित है। इसमें समय समय पर कोर्ट ने आदेश जारी किए, समिति का गठन हुआ, लेकिन विकास नहीं हुआ। सरोवर की बदहाली जैसे की वैसी बनी रही। ऐसे में पुरानी समिति को बर्खास्त करके एक नई समिति बनाकर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। जिसके बाद कोर्ट ने यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने एड. परचुरे और अन्य पक्षों के वकीलों को समिति के कार्य की रूपरेखा सुझाने को कहा है। वहीं सरोवर के इजेक्टा ब्लैंकेट में बाधा डालने वाली सड़क को वहां से हटाने के भी आदेश प्रशासन को दिए गए हैं। 

कार्यशैली पर जताया था असंतोष 
हाईकोर्ट के बार-बार आदेश देने के बावजूद लोणार सरोवर के विकास के प्रति लापरवाही बरतने वाले राज्य के प्रशासनिक विभागों को बीती सुनवाई में कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी। कोर्ट की कई सुनवाइयों में अनुपस्थित रहने वाली बुलढाणा की जिलाधिकारी सुमन चंद्रा की कार्यशैली पर भी असंतोष जताया था। न्या. सुनील शुक्रे और न्या.अनिल किल्लोर की खंडपीठ ने प्रशासन की अकार्यक्षमता को जख्मों पर नमक छिड़कने वाला काम बताया था। कोर्ट ने साफ किया था कि इस पूरे प्रकरण में कोर्ट ने माना कि सरोवर के संवर्धन की प्राथमिक जिम्मेदारी बुलढाणा जिलाधिकारी की है। इसके बाद नगर परिषद के मुख्याधिकारी व सार्वजनिक निर्माणकार्य विभाग की जिम्मेदारी है।

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