comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

तस्करों का नया फंडा : महाराष्ट्र की नदियों से अवैध रेत उत्खनन कर दिखा रहे एमपी की रॉयल्टी

October 08th, 2018 22:17 IST
तस्करों का नया फंडा : महाराष्ट्र की नदियों से अवैध रेत उत्खनन कर दिखा रहे एमपी की रॉयल्टी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। रेत उत्खनन पर लगने वाले टैक्स से बचने के लिए अब जो कदम उठा रहे हैं, उससे मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र, दोनों ही सरकारों को भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। दरअसल, भंडारा, गोंदिया की नदियों से अवैध रेत उत्खनन कर इतनी सफाई से वे इस पर मध्यप्रदेश की रॉयल्टी चिपका कर रहे हैं कि चेक पोस्ट से रेत का अासानी से अवैध परिवहन हो रहा है। हालांकि इसमें महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के कुछ स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत भी मानी जा रही है।

सावनेर मार्ग का सर्वाधिक इस्तेमाल 
स्थिति यह है कि कभी अवैध रेत उत्खनन के मामले में शांत कहे वाले गडचिरोली जिले में भी तस्करों ने अपनी पैठ जमा ली है। उत्खनन कर इसे सावनेर और उमरेड मार्ग से नागपुर लाया जा रहा है। चोरी में सर्वाधिक सावनेर मार्ग का इस्तेमाल हो रहा है। अप्रैल से सितंबर तक सावनेर मार्ग पर 126 मामलों में अवैध रेत तस्करी व परिवहन से जुड़े मामले पकड़े गए हैं। इसके बाद भिवापुर का नंबर आता है। बताया जाता है कि भंडारा, गोंदिया के अलावा रेत तस्करों ने अब मध्यप्रदेश के सौंसर, सिवनी और बालाघाट की नदियों को भी निशाना बना लिया है। सौंसर के मालेगांव घाट से पिछले 3 साल से लगातार रेत उत्खनन हो रहा है।

मध्य प्रदेश में उत्खनन का कोई तय पैमाना नहीं होने से आसानी से नदियों को खाली किया जा रहा है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ अधिकारियों के साथ मिलीभगत होने के कारण नागपुर में यह आसानी से परिवहन कर रहे हैं। शुक्रवार को खरबी रोड पर तहसीलदार श्रीमती बोरकर द्वारा 15 ट्रकों पर कार्रवाई करने के बाद ये ट्रक बालाघाट से आने का खुलासा हुआ है। 

नीलामी रोकने पीआईएल का खेल ताकि दूसरों को न मिले रेत
नागपुर जिले में इस वर्ष एक भी रेत घाट की नीलामी नहीं हो पाई है। उच्च न्यायालय ने नीलामी पर रोक लगा दी थी। नागपुर में रेत घाटों की नीलामी के कारण नागपुर िजला प्रशासन को हर साल करीब 20 से 21 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन इस बार प्रशासन राजस्व से चूक गया। रेत घाटों को नीलामी से रोकने के लिए एक गिरोह नागपुर में बड़े पैमाने पर सक्रिय होने की जानकारी है। यह गिरोह कोर्ट में पीआईएल दाखिल कर रेत घाटों की नीलामी में स्थगन लाने की हर बार कोशिश करता है। रेत घाट नीलामी प्रक्रिया में इतने नियम-कानून के पेंच है कि प्रशासन कहीं न कहीं फंस जाता है। वे कोर्ट में जवाब नहीं दे पाते। इसके आधार पर रेत घाट की नीलामी प्रक्रिया रोकना आसानी होता है। 

रेत उत्खनन के बाद इसे बाहर से लाने का दिखावा करने के लिए कभी भंडारा और कभी सावनेर मार्ग से नागपुर में प्रवेश होता रहा है। हालांकि भंडारा, गोंदिया और गडचिरोली में अब अवैध उत्खनन के लिए ज्यादा जाने जाते हैं। नागपुर में रेत घाटों पर पूर्णत प्रतिबंध होने से भंडारा, गोंदिया और गडचिरोली पर चोरों का ज्यादा जोर रहा। इन तीन जिलों में रेत ठेकेदारों को जितना रेत निकालने की अनुमति मिली थी, उससे कहीं ज्यादा रेत का उत्खनन किया गया। गोंदिया जिले के घाट कुरोडा नदी का उदाहरण देते हुए सूत्रों ने बताया कि घाट कुरोडा में 19 हजार ब्रास रेत निकालने की अनुमति मिली थी, लेकिन रेत ठेकेदारों ने अवैध उत्खनन कर यहां से करीब 50 हजार ब्रास रेत निकाल डाली। अवैध रेत उत्खनन कर इसे नागपुर में लाकर बेचा जा रहा है। एक-एक ट्रक में करीब 8 से 10 हजार रुपए की कमाई हो रही है। 

एक बड़े नेता का करीबी इस खेल में माहिर
सूत्रों पर यकीन किया जाए को एक बड़े नेता का करीबी इस खेल में माहिर है, जो हर साल कानूनी वाद पैदा कर नागपुर की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करता है। नागपुर में रेत घाटों की नीलामी प्रक्रिया रोककर वह भंडारा, गोंदिया व अन्य जिलों से रेत की तस्करी करता है ताकि उसे पूरा फायदा मिल सके। 

ड्रोन का भी दुरुपयोग होने का आरोप
दो साल पहले नागपुर में रेत घाटों पर होने वाले अवैध उत्खनन को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया था। ड्रोन का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर चोरी पकड़ी गई थी। किन्तु इसका भी दुरुपयोग होने का आरोप है। बताया गया कि ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ कुछ लोगों के लिए हुआ। सावनेर और कामठी क्षेत्रों के घाटों पर ही इसका इस्तेमाल होने का आरोप है। इसके अलावा जिले में अन्यत्र कहीं ड्रोन का इस्तेमाल नहीं किया गया। इस कारण प्रशासन की नीयत पर भी सवाल उठते रहे। 

30 सितंबर से सभी घाट बंद
फिलहाल 30 सितंबर से विदर्भ के सभी रेत घाटों को बंद कर दिया गया है। अब कानूनी तौर पर सभी घाट बंद हो गए हैं। बावजूद इसके रेत घाटों से चोरी जारी है। खरबी रोड पर शुक्रवार को हुई कार्रवाई इसका बड़ा उदाहरण है। 

कमेंट करें
V9rLv
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।