दैनिक भास्कर हिंदी: शालेय पोषण आहार का नया मेनू : अब मिलेगा दाल-चावल , बिस्कुट, केला, चिक्की, मुरमुरा और राजगिरे का लड्‌डू

September 11th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शालेय पोषण आहार योजना का नया मेनू तय किया गया है। इसमें मध्याह्न भोजन में स्टूडेंट्स को सप्ताह में 3 दिन दाल-चावल, 1 दिन मोंठ और 2 दिन बटाना उसल के साथ चावल देना अनिवार्य है। साथ ही पूरक आहार के रूप में बिस्कुट, केले, मूंगफली की चिक्की, मुरमुरा और राजगिरे के लड्डू देना अपेक्षित है। शालेय शिक्षा तथा क्रीड़ा विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। कक्षा पहलीं से 8वीं तक पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है। जिले में 2,822 स्कूलों में 3 लाख 40 हजार से अधिक विद्यार्थी मध्याह्न भोजन के लाभार्थी हैं।

बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने तथा पोषक तत्वों की आपूर्ति कर स्वास्थ्य में सुधार की दृष्टि से केंद्र सरकार की ओर से मध्याह्न भोजन योजना शुरू की गई। समय-समय पर इसमें सुधार किए गए। खिचड़ी, मोंठ, बटाना उसल से शुरू हुई इस योजना में पिछले शैक्षणिक सत्र से तुअर दाल को शामिल किया गया। सप्ताह में 3 दिन दाल-चावल देने के निर्देश दिए गए। चालू शैक्षणिक वर्ष में नया मेनू बनाकर 3 दिन दाल-चावल अनिवार्य किया गया। 1 दिन मोंठ और 2 दिन बटाना उसल के साथ चावल और सप्ताह में एक दिन पूरक आहार बिस्कीट, केले, मूंगफली की चिक्की, मुरमुरा और राजगिरे के लड्डू देना अनिवार्य किया गया है। कक्षा पहली से पांचवीं के विद्यार्थियों को 450 उष्मांक और 12 ग्राम प्रोटीन तथा कक्षा 6वीं से 8वीं के विद्यार्थियों को 700 उष्मांक आैर 20 ग्राम प्रोटीन आपूर्ति मध्याह्न भोजन से होनी अपेक्षित है।

कागजों में सीमित योजना
सरकार ने भले ही सप्ताह में 3 दिन दाल देना अनिवार्य किया है, परंतु जमीनी हकीकत यह है कि, किसी भी स्कूल में दाल नहीं है। केवल नियम बनाकर दाल देना अनिवार्य किए जाने से योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई है। फरवरी महीने में दाल की पहली खेप स्कूलों में पहुंचाई गई थी। उसी में से जो बची थी, उसी का चालू शैक्षणिक वर्ष में उपयोग किया गया। चालू शैक्षणिक सत्र में किसी भी स्कूल में दाल नहीं पहुंचाई गई है। विद्यार्थियों को चावल के साथ मोंठ और बटाना उसल दी जा रही है।

सप्लायर को अभयदान
राज्य सरकार ने महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन के साथ स्कूलों में दाल पहुंचाने का करार किया है। दिसंबर 2017 में की मांग की गई दाल की आपूर्ति फरवरी महीने में की गई। चालू शैक्षणिक वर्ष मांग करने के बावजूद किसी भी स्कूल में आपूर्ति नहीं की गई। कर्तव्य में कसूर करने के बावजूद सप्लायर के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। सप्लायर को अभयदान दिए जाने से पालकों में रोष है।

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