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NIT को लेकर  दोहरी नीति , जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने लगी NMC

NIT को लेकर  दोहरी नीति , जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने लगी NMC

डिजिटल डेस्क,नागपुर। तत्कालीन फडणवीस सरकार ने एनआईटी को बर्खास्त कर उसे मनपा में समायोजित करने का फैसला लिया था, लेकिन उद्धव ठाकरे सरकार ने यह फैसला पलटते हुए नासुप्र को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया। इस निर्णय को मनपा सत्तापक्ष ने दोधारी तलवार की तरह इस्तेमाल करने का प्रयास किया है।  

मनपा की ऑनलाइन आमसभा  
 मनपा की ऑनलाइन आमसभा हुई। एनआईटी बर्खास्तगी निर्णय के बाद गुंठेवारी ले-आउट मनपा को हस्तांतरित किए गए थे। फिलहाल नासुप्र बहाली का अधिकृत परिपत्रक नहीं मिलने का हवाला देकर मनपा ने इसे हस्तांतरित करने से मना कर दिया है।  प्राप्त अधिकार का उपयोग कर मनपा ने आमसभा में गुंठेवारी अधिनियम अंतर्गत भूखंड का नियमितीकरण शुल्क 2 हजार रुपए और विकास शुल्क 56 रुपए वर्ग फीट रखने का प्रस्ताव पारित किया गया। मनपा सत्तापक्ष का कहना है कि जब तक परिपत्रक नहीं मिलता है, तब तक मनपा को प्राप्त अधिकार का इस्तेमाल कर गुंठेवारी ले-आउट का विकास किया जाएगा। हालांकि दूसरी ओर मनपा ने नासुप्र को गार्डन लौटाने पर मुहर लगा दी है। 

इन पर लगी मुहर
-गुंठेवारी अधिनियम के अंतर्गत मंजूर ले-आउट में वर्ष 2002 से भूखंड का नियमितीकरण शुल्क 1000 रुपए लिया जा रहा है। मंजूर ले-आउट में भूखंडधारकों को नियमितीकरण के लिए काफी समय दिया गया, लेकिन भूखंडधारकों ने लापरवाही बरती। 
-बिना नियमितीकरण किए भूखंडधारकों ने सुविधाओं का उपभोग किया। पूर्व निर्धारित दर से शुल्क वसूल करने पर मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने निधि कम पड़ने का हवाला देकर नगर रचना विभाग ने नियमितीकरण शुल्क 1000 से बढ़ाकर 15 हजार व विकास शुल्क 56 रुपए प्रति वर्ग फीट से बढ़ाकर 132 रुपए करने का आमसभा को प्रस्ताव दिया। 
-इस प्रस्ताव पर चर्चा में सहभागी सदस्यों ने नियमितीकरण शुल्क 1000 से बढ़ाकर 2 हजार करने व विकास शुल्क में कोई वृद्धि नहीं करते हुए पूर्ववत 56 रुपए वर्ग फीट रखने की मांग की। 
-एनआईटी पुनर्जीवित करने का मनपा को परिपत्रक नहीं मिला है। जब तक परिपत्रक नहीं मिलता, तब तक गुंठेवारी का अधिकार मनपा के पास है। इस अधिकार का उपयोग कर प्रस्ताव मंजूर किया गया।

एनआईटी उद्यान वापस लौटाने का निर्णय
एनआईटी का मनपा में समायोजन करने के तत्कालीन सरकार के निर्णय के बाद धीरे-धीरे हस्तांतरण प्रक्रिया आरंभ हो गई थी। एनआईटी के उद्यानों का सबसे पहले मनपा को हस्तांतरण किया गया। लगभग 56 उद्यानों की हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। मनपा के अपने 126 उद्यान हैं। उसी पर खर्च के लिए मनपा निधि का रोना रो रही है। एनआईटी के उद्यानों का हस्तांतरण होने से मनपा पर 200 उद्यानों की जिम्मेदारी आ गई। मनपा सत्तापक्ष पहले से ही एनआईटी के उद्यानों की जिम्मेदारी संभालने के पक्ष में नहीं रहा। महाविकास आघाड़ी ने एनआईटी को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया। मनपा में सत्तापक्ष राज्य सरकार के इस निर्णय के खिलाफ है, लेकिन आमसभा में एनआईटी के उद्यान वापस करने का प्रस्ताव मंजूर किया। मनपा की दोहरी नीति में भविष्य की राजनीति साफ झलक उठी।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।