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‘हैलो महापौर एप’ से बेखबर अधिकारी, सुनते ही भड़के तिवारी

‘हैलो महापौर एप’ से बेखबर अधिकारी, सुनते ही भड़के तिवारी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शहर के नागरिकों की समस्या जानने व उसका हल निकालने तत्कालीन महापौर संदीप जोशी ने "हैलो महापौर एप' लांच किया था। एक एप रहते हुए तत्कालीन आयुक्त तुकाराम मुंढे ने ‘नागपुर लाइव एप’ चालू किया। इस एप के लिए 2.92 लाख रुपए खर्च किए गए। इसे लेकर महापौर दयाशंकर तिवारी भड़क गए। कार्यकारी अभियंता श्वेता बैनर्जी ने ‘हैलो महापौर एप’ से अधिकारी बेखबर बताने पर महापौर का पारा सातवें आसमान जा पहुंचा। उन्होंने नागरिकों की समस्या सुनने व सुलझाने के लिए कोई एक एप रखने के प्रशासन को निर्देश दिए। 

एनडीएस की कार्यप्रणाली की जांच करेगी समिति
एनडीएस (उपद्रव शोध दल) की कार्यप्रणाली पर आमसभा में सवाल प्रश्न उपस्थित किए गए। सदस्यों ने एनडीएस जवानों के रवैए पर सवाल उपस्थित कर कुछ जवानों के कारण पूरे दल की बदनामी होने का आरोप लगाया। इस मुद्दे पर महापौर ने पांच सदस्यीय समिति गठित कर जांच करने के आदेश दिए। समिति में 3 अधिकारी और 2 जनप्रतिनिधि का समावेश रहेगा।

महापौर के वाट्सएप से संपर्क
"हैलो महापौर’ एप में नागरिकों को अपने मोबाइल से महापौर के वाट्एप से संपर्क करने की सुविधा है। नागरिकों की शिकायतों पर महापौर सीधे प्रशासन को निर्देश देते थे। महापौर से शिकायत करने पर अपनी शिकायत पर की गई कार्रवाई की जानकारी नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन देखने की सुविधा है। तत्कालीन आयुक्त ने "हैलो महापौर’ एप रहते हुए नागपुर लाइन एप लांच किया। इस पर मनपा की तिजोरी से 2 लाख, 92 हजार रुपए खर्च हुए। इस विषय पर विधि समिति सभापति एड. धर्मपाल मेश्राम ने आमसभा में आपत्ति दर्ज की। उन्होंने कहा कि एक एप रहने के बाद दूसरे एप की क्या जरूरत पड़ी। पूर्व महापौर संदीप जोशी, विधायक प्रवीण दटके ने इस विषय को उठाकर प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। प्रशासन की ओर से गोलमोल जवाब दिया।  

प्रशासन-पदाधिकारी में समन्वय का अभाव
कार्यकारी अभियंता श्वेता बैनर्जी ने महापौर एप से अधिकारियों को बेखबर बताया। यह सुनकर महापौर भड़क गए। जब एप की जानकारी नहीं थी, तो शिकायतों का जवाब क्या नासुप्र के अधिकारी दे रहे थे, यह कहते हुए प्रतिप्रश्न किया। प्रवीण दटके ने महापौर एप पर मिलने वाली शिकायतों को किनारा करने का प्रशासन पर आरोप लगाया। महापौर ने प्रशासन की इस भूमिका पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पदाधिकारी एक वाहन के दो पहिये हैं। दोनों के बीच समन्वय का अभाव है। महापौर ने लांच किए एप में कोई त्रुटियां रहीं होगी, तो उसमें सुधार किया जा सकता था, परंतु उसे नजरअंदाज कर नया एप लांच करना उचित नहीं है। भविष्य में मनपा का एक ही एप रखने के निर्देश दिए। 

प्रशासकीय समितियाें का बहाना, आयुक्त पर निशाना
मनपा पदाधिकारी और आयुक्त के बीच अधिकारों को लेकर खींचतान चल रही है। प्रशासकीय समितियों के गठन को लेकर आमसभा में उठाए गए सवाल से खटास खुलकर सामने आई। मनपा में अतिरिक्त आयुक्त की अध्यक्षता में 18 प्रशासकीय समितियां गठित की गई हैं। किस अधिकार में समितियों का गठन किया गया, यह प्रश्न उपस्थित कर आयुक्त पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा गया। महापौर ने प्रशासकीय समितियों के गठन पर प्रशासन से जवाब तलब किया।


  

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।