दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर में ऑनलाइन वायवा... 416 को पीएचडी

January 19th, 2021

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोरोना संक्रमण के कारण लागू लॉकडाउन में भी राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रक्रिया जारी रही। अभ्यर्थियों का प्रत्यक्ष (ऑफलाइन) वायवा न ले पाने के कारण नागपुर यूनिवर्सिटी ने ऑनलाइन वायवा लेने की तरकीब निकाली, जो काफी हद तक कारगार रही।  लॉकडाउन में नागपुर विश्वविद्यालय ने कुल 416 अभ्यर्थियों का ऑनलाइन वायवा लेकर उन्हें पीएचडी नोटिफाई किया है। दावा किया जा रहा है कि यह संख्या प्रदेश के सभी गैर-कृषि विश्वविद्यालयों की तुलना में सर्वाधिक है। आंकड़ों के अनुसार 31 जनवरी 2020 से लेकर 1 जनवरी 2021 तक नागपुर विवि ने कुल 657 अभ्यर्थियों को पीएचडी डिग्री नोटिफाई की है। इसमें से 240 का वायवा लॉकडाउन के पूर्व ऑफलाइन पद्धति से और लॉकडाउन के बाद 416 अभ्यर्थियों का आॅनलाइन वायवा लिया गया। विवि प्रशासन ने आगामी दीक्षांत समारोह तक करीब 800 अभ्यर्थियों को पीएचडी नोटिफाई करने का लक्ष्य रखा है। 

एक्सटर्नल बुलाने पर करना पड़ता था खर्च
उल्लेखनीय है कि प्रत्यक्ष वायवा में बाहर से एक्सटर्नल बुलाने के बाद उनके टीए-डीए व अन्य प्रबंधों में नागपुर विवि को प्रत्येक पर करीब 5 हजार रुपए का खर्च पड़ता था, लेकिन इस बार ऑनलाइन वायवा होने के कारण विवि के करीब 20 लाख रुपए की बचत हुई है। 

जून में हुआ था ट्रायल
राज्य सरकार के निर्देश के बाद नागपुर विवि ने जून 2020 में पीएचडी ऑनलाइन वायवा का ट्रायल  लिया था। इसमें 5 अभ्यर्थियों का वायवा लिया गया। एक माह में वायवा लेकर परिणाम जारी करने का उद्देश्य रखा गया था। उल्लेखनीय है कि विवि से पीएचडी कर रहे अभ्यर्थियों थीसिस जमा करने के बाद कई कई वर्षों तक वायवा के लिए इंतजार करना पड़ता है। कई बार शोधार्थियों के शिष्टमंडल ने कुलगुरु से मिल कर शिकायत सौंपी थी।  एक बार थीसिस करने के बाद उसका मूल्यांकन करने के लिए 2 से 4 वर्षों तक का समय लगता है, जबकि यूजीसी के नियमों के मुताबिक एक बार थीसिस जमा होने 6 माह के भीतर वायवा होना चाहिए। थीसिस पर मूल्यांकनकर्ताओं की रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद वायवा लगने में लंबा समय लग जाता है। इस कवायद में कई वर्ष बीत जाते हैं। लेकिन  ऑनलाइन वायवा करने से इस विलंब को समाप्त करना विवि के लिए संभव हो सका है।