दैनिक भास्कर हिंदी: 18 साल के दौरान नागपुर जिले में मिला फसल बीमा का लाभ महज 15 करोड़

September 16th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। पिछले 18 साल में रबी के मौसम में फसल लेनेवाले नागपुर जिले के 44876 किसानों को 15 करोड़ 26 लाख का फसल बीमा मिला है। RTI से मिली यह जानकारी बेहद चौंकानेवाली है, इसलिए कि इसमें सब कुछ ठीक नजर नहीं आ रहा। आंकड़ों के इस हिसाब से प्रति साल एक करोड़ रुपए से भी कम का फसल बीमा किसानों को मिला। वर्तमान में जिले में किसानों की संख्या लगभग ढाई लाख के आस-पास है। इसके पहले के क्रमश: वर्षों में किसानों की संख्या और ज्यादा ही होगी, पर इस ढाई लाख की संख्या को ही फिक्स मानकर चलें तो 18 साल में यह (2.5 लाख गुना 18) मतलब 45 लाख के आस-पास होता है। मतलब इन 18 सालों में इसका लगभग सौवां भाग (44876 किसान) ही फसल बीमा से लाभान्वित हो पाया।     

RTI में मिली जानकारी के अनुसार, बुआई से लेकर फसल कटाई तक होनेवाले नुकसान पर फसल बीमा योजना लागू होती है। कटाई होने के बाद होनेवाले नुकसान पर फसल बीमा का लाभ नहीं मिलता। 

प्राकृतिक आपदा, प्राकृतिक आग, बिजली गिरना, आंधी-तूफान, अतिवृष्टि, बाढ़, भूस्खलन, सूखा, अनियमित बारिश, कीट व रोग लगने से होनेवाले नुकसान के लिए फसल बीमा दिया जाता है। 

फसल के नुकसान का जायजा जिला प्रशासन व कृषि विभाग मिलकर लेता है। नुकसानग्रस्त क्षेत्रों के पंचनामे तैयार किए जाते हैं। संबंधित बीमा कंपनी के प्रतिनिधि संबंधित क्षेत्रों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार करते हैं। 

बीमा कंपनी द्वारा जो तकनीकी मानक तय किए गए हैं, उन मानकों को पूरा करने के बाद ही बीमा कंपनी किसानों को फसल बीमा का लाभ देती है। 

यह है फसल बीमा
नागपुर समेत देश भर में रबी व खरीफ मौसम में फसल ली जाती है। अतिवृष्टि व सूखे का खतरा हमेशा फसल को बना रहता है। फसल का नुकसान होने पर किसान की आर्थिक स्थित बेहद खराब हो जाती है। किसान को इस मुसिबत से बचाने के लिए फसल का बीमा कराया जाता है। जो किसान बैंक से फसल कर्ज लेता है उसे फसल बीमा कराना अनिवार्य है आैर बैंक से कर्ज नहीं लेनेवाले किसान को फसल का बीमा कराना अनिवार्य नहीं है।

बदलती रहती हैं बीमा कंपनियां
रबी के मौसम में वर्ष 1999-2000 से लेकर वर्ष 2017-18 तक 44876 किसानों को 15 करोड़ 26 लाख का फसल बीमा दिया गया हैै। इसमें खरीफ मौसम में ली गई खेती के नुकसान का आंकड़ा शामिल नहीं है। बीमा कंपनियां हर दो-तीन साल में बदलती रहती हैैं। सरकार अपनी तरफ से किसानों को जो नुकसान भरपाई देती है, वह इसमें शामिल नहीं है। 

कब नहीं मिलता बीमा का लाभ
युद्ध के दुष्परिणाम, जान-बूझकर नुकसान करना, जो खतरा टाला जा सकता है, साजिश के तहत नुकसान करना आैर फायदे के िलए ऐसा कृत्य करना जिससे फसल बर्बाद हो। ऐसे मामलों में फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलता। फसल बीमा योजना का नाम अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो गया है। 

किसान भरता है केवल 5 फीसदी प्रीमियम
किसान केवल 5 फीसदी तक ही फसल बीमा का प्रीमियम भरता है। प्रीमियम की 95 फीसदी राशि केंद्र व राज्य सरकार मिलकर भरती हैै। अलग-अलग फसलांे के लिए अलग-अलग प्रीमियम तय किए हैं। किसी फसल पर किसान 2 फीसदी तो किसी फसल पर किसान 5 फीसदी प्रीमियम भरता है। नुकसान होने पर बीमा का पूरा लाभ किसान को मिलता है। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार प्रीमियम का 95 फीसदी हिस्सा खुद वहन करती है।