दैनिक भास्कर हिंदी: मुख्यमंत्री ने कहा - दर्जेदार फसलों का महाराष्ट्र ब्रांड तैयार करें

May 20th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि प्रदेश में आधुनिक तकनीकी और उत्तम अनुसंधान के माध्यम से दर्जेदार फसलों का महाराष्ट्र ब्रांड तैयार किया जाना चाहिए। गुरुवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में खरीफ फसल सीजन पूर्व राज्य स्तरीय बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो बिकेगा उसी की बुवाई की जाएगी इस अभियान के तहत विभिन्न परिकल्पना पर काम किया जा रहा है। केवल फसलों के उत्पादन बढ़ाना महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि विभागवार फसलों का वर्गीकरण किया जाना चाहिए। इसके जरिए दर्जेदार फसलों का महाराष्ट्र ब्रांड तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोजने हेतु शोध करने की आवश्यकता है।

फसल कर्ज के लिए बैंक बैठक करें- उपमुख्यमंत्री 

उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने किसानों को समय पर फसल कर्ज उपलब्ध कराने के लिए बैंकों की बैठक आयोजित करने के निर्देश मुख्य सचिव सीताराम कुंटे को दिए। उन्होंने कहा कि कोरोना की पांबदी के दौरान खाद, बीज और कृषि औजार और मशीनों की दुकानों को शुरू रहे। इसके लिए मदद व पुनर्वसन सचिव असीम गुप्ता नियोजन करें। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग की योजनाओं की बकाया निधि देने का फैसला सोमवार को बैठक बुलाकर किया जाएगा। 

157 लाख हेक्येटर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई- भुसे

प्रदेश के कृषि मंत्री दादाजी भुसे ने बताया कि राज्य में खरीफ फसल सीजन में 157 लाख हेक्येटर क्षेत्र में बुवाई का नियोजन है। खरीफ सीजन में कपास 43 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन 43.50 लाख हेक्येटर, धान 15.50 लाख हेक्येटर, मक्का 8.84 लाख हेक्येटर, अनाज 23 लाख हेक्येटर और गन्ने की 9.50 लाख हेक्येटर क्षेत्र बुवाई होगी। खरीफ फसल सीजन के लिए 63.64 लाख मीट्रिक टन खाद और 18.26 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध है। साल 2021-22 में यूरिया ड़ेढ लाख मीट्रिक टन भंडारण करने की योजना है। फिलहाल 30 हजार मीट्रिक टन भंडारण हुआ है। भुसे ने कहा कि खरीफ की फसलों की बुवाई के लिए खाद और बीज की कमी नहीं होने दी जाएगी। राज्य में पहली बार ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम कृषि विकास समिति स्थापित की गई है। जिसके जरिए गांवों के कृषि विकास की योजना है। 

सोयाबीन का 29 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध

भुसे ने कहा कि राज्य के कृषि विभाग ने बीज तैयार करने के लिए प्रोत्साहन देने का फैसला किया है। इससे राज्य में सोयाबीन का 29 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध है। कपास का 1 करोड़ 71 लाख बीज पैकेट की आवश्यकता है। इसको ध्यान में रखते हुए 2 करोड़ 22 लाख कपास बीज आपूर्ति की तैयारी है। किसानों को दर्जदार खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 395 उड़न दस्ते की स्थापना की गई है। भुसे ने बताया कि फसलों के उत्पादन का अनुमान निकालने के लिए राज्य के कृषि विभाग और नागपुर के एमआरएसएसी के संयुक्त प्रयास से महाएग्रिटेक परियोजना शुरू है। 

फसल कर्ज देने की तैयारी  

नाबार्ड कर्ज प्रारूप के अनुसार राज्य में किसानों को 79 हजार 190 करोड़ रुपए फसल कर्ज और 48 हजार 148 करोड़ रुपए सावधि ऋण व मूलभुत सुविधा के लिए कर्ज देने की योजना है। 
 

तुअर, मूंग और उड़द के आयात खोलने से होगा नुकसान

केंद्र सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर तुअर, मूंग और उड़द को प्रतिबंधित श्रेणी से हटा दिया। दि होलसेल ग्रेन एंड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के सचिव प्रताप मोटवानी ने कहा कि इस तुगलकी निर्णय से किसान बेहद प्रभावित होंगे और व्यापार को बेहद नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि इसके पूर्व इन जिंसों पर प्रतीकात्मक प्रतिबंध होने से सरकार लाइसेंस जारी करती थी तभी देश में आयात होता था। इन जिंसों के आयात की साल भर में एक मात्रा तय की जाती थी, ताकि देश के किसानों को समर्थन मूल्यों के दाम मिल सके। सरकार देश को दालों में आत्मनिर्भर बनाना चाहती थी।

सरकार के अप्रत्याशित निर्णय से किसान बेहद प्रभावित होंगे। इस निर्णय से बाजारों में घबराहट रही। एक तरफ देश कोरोना से जूझ रहा है। किसानों को एमएसपी भाव मिलना मुश्किल होगा। इसका बाजारों और व्यापार पर बेहद असर होगा। एकाएक आयात खोलने से बाजार का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है। दो दिनों में दलहनों में बाजार घट गए। लेवाल कम और बिकवाल ज्यादा रहे। मोटवानी ने बताया कि सरकार की नीति से कोई भी मिलर्स ट्रेडर्स या व्यापारी आयात कितनी भी मात्रा में कर सकता है। सरकारी आदेश से किसान और व्यापारी असमंजस की स्थिति में माल खरीदने के बजाय बेचने के मूड में है।