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नागपुर में दूसरी लहर के कारण अटके ऑपरेशन

नागपुर में दूसरी लहर के कारण अटके ऑपरेशन

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  शहर में कोरोना ने मार्च में दस्तक दी थी। अगस्त-सितंंबर में मरीजों की संख्या ढाई हजार तक पहुंच गई थी। अब दीपावली के बाद दूसरी लहर आने की आशंका जताई जा रही है। यही वजह है कि शहर के सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन की रफ्तार धीमी पड़ी हुई है। मार्च के पहले की अपेक्षा आॅपरेशन की संख्या में 50 से 60 फीसदी कम हो रहे हैं। ऐसे में मेयो या मेडिकल में से एक अस्पताल को कोविड के आरक्षण से बाहर किया जा सकता है, जिससे एक मेडिकल कॉलेज को कोविड से बड़ी राहत मिल सकती है।

सामान्य और प्लान सर्जरी होनी लगभग बंद  
वर्तमान में सामान्य और प्लान सर्जरी होना लगभग बंद है। वहीं अस्पताल में कोरोना के मरीजों की संख्या मंे भी कमी आ गई है, जिस वजह से मामला ठंडा हो गया है और कई विभागों के डॉक्टर के पास काम भी बहुत कम हो गया है। कोरोना के दौरान प्रसूति, हड्डी रोग विभाग, न्यूरो, इमरजेंसी के ऑपरेशन नियमित रूप से हो रहे थे, क्योंकि इनको टाला नहीं जा सकता है। वहीं, नाक, कान एवं गला, नेत्ररोग विभाग, सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी जैसे विभागों के ऑपरेशन में खासी कमी आई है। 

800 बेड हैं खाली
वर्तमान में मेयो-मेडिकल में कोरोना मरीजों के उपचार के लिए करीब 1200 बेड हैं। वहीं, मेडिकल में 400 पलंग की तैयारी की जा रही है, जिससे कुल 1600 पलंग हो जाएंगे। फिलहाल सिर्फ 300 से 400 मरीज अस्पताल मंे भर्ती हैं। वर्तमान में करीब 800 पलंग खाली पड़े हुए हैं। यदि इनका उपयोग अन्य ऑपरेशन और उपचार के लिए किया जाने लगा तो उसका लाभ जरूरतमंद लोगों को मिलने लगेगा। विशेष बात यह है कि मरीजों की संख्या कम होने पर कोरोना मरीजों को एक अस्पताल में शिफ्ट किया जा सकता है। इससे एक कॉलेज को कोरोना से राहत मिल सकती है।

400 बेड तैयार करने का चल रहा काम
जानकारी के अनुसार इंदिरा गांधी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेयो) में कोरोना मरीजों के उपचार के लिए करीब 600 पलंग की व्यवस्था है, लेकिन मरीजों की संख्या घटने के कारण फिलहाल कुल औसत 50 से 70 ही अस्पताल में भर्ती रहते है। यहां, कोरोना वार्ड, सारी वॉर्ड और आईसीयू में मरीजों का उपचार किया जा रहा है। वहीं, शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेडिकल) में वर्तमान में कोरोना मरीजों के लिए 600 पलंग आरक्षित है और 400 पलंग तैयार करने का काम चल रहा है। हालांकि मेडिकल में भी औसत 250 से 300 मरीज भर्ती रहते हैं। मेडिकल के ट्रॉमा में करीब 4 वॉर्ड, सारी वॉर्ड के अलावा मेडिसिन विभाग के कुछ वार्ड को कोरोना मरीजों के लिए आरंभ किया गया है।
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।