दैनिक भास्कर हिंदी: गोबर खाद का इस्तेमाल कर किसान उत्पादन क्षमता बढ़ाएं : पद्मश्री डॉ. पालेकर

September 17th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। पद्मश्री डॉ. सुभाष पालेकर ने कहा कि, गाय के गोबर खाद  के इस्तेमाल से खेती की उत्पादन क्षमता बढ़ती है आैर फसल उत्पादन खर्च में भी कमी आती है। उन्होंने किसानों को जीरो बजट खेती की आेर बढ़ने का आह्वान किया। वे नागपुर नेचुरल संस्था की आेर से वसंतराव देशपांडे सभागार में आयोजित "चला निसर्गाकडे’ प्रशिक्षण शिविर में बोल रहे थे। मंच पर कैंसर विशेषज्ञ डा. कृष्णा कांबले, संस्था के हेमंतसिंह चौहान, उप-प्रादेेशिक परिवहन अधिकारी (गडचिरोली) रवींद्र भुयार प्रमुखता से उपस्थित थे।

उर्वरक क्षमता भी बढ़ेगी
उन्होंने कहा कि, किसान खेती में रासायनिक खाद व कीटनाशकों का इस्तेमाल करता है। किसान की मंशा ज्यादा से ज्यादा उत्पादन लेने की होती है। रासायनिक खाद की जगह प्राकृतिक गोबर खाद का इस्तेमाल किया तो जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी आैर इसमें खर्च भी कम आएगा। लागत मूल्य कम होने का फायदा किसानों को होगा आैर देश की अर्थव्यवस्था को भी मदद मिलेगी। देश में 35 करोड़ एकड़ जमीन है। 26 करोड़ मीट्रिक टन अनाज का उत्पादन लिया जाता है। बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए 50 करोड़ मीट्रिक टन अनाज उत्पादन करना पड़ सकता है। रासायनिक खाद व कीटनाशक से जमीन की क्षमता प्रभावित होने के साथ ही मानव शरीर पर भी इसका असर होता है।

प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल फायदेमंद
प्राकृतिक खाद से जमीन की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी आैर मानव शरीर पर भी असर नहीं पड़ेगा। मानव जीवनचर्या व जीवनशैली बदल गई है। भागदौड़ भरी जिंदगी में प्राकृतिक संसाधनों का -हास हो रहा है। यह -हास रोकने के लिए हर व्यक्ति को प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। विविध वस्तुआें का इस्तेमाल दिनचर्या में होता है आैर ये कंपनियां विदेशी होती हैं। खरीदी गई वस्तु का लाभ विदेशी कंपनी यानी विदेशी तिजोरी को होता है।

प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने पर जरूरतमंदों को रोजगार भी मिलेगा। देश की अर्थव्यवस्था में आैर सुधार लाने में मदद मिलेगी।  कैंसर चिकित्सक डा. कृष्णा कांबले ने कहा कि, रासायनिक खाद व कीटनाशकों के इस्तेमाल से कैैंसर रोग का प्रमाण बढ़ रहा है। यह मानव शरीर को घातक है। ऐसे रसायनों व कीटनाशकों का उपयोग बंद होना चाहिए। संचालन वीरेंद्र बरबटे ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।