यूपी विधानसभा चुनाव 2022: पंचायत आज तक 2022 में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं अखिलेश यादव ने की शिरकत 

January 11th, 2022

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव होने में बस कुछ दिन ही बचे हैं। सभी राजनीतिक दल सत्ता में वापसी के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। इसी सियासी सरगर्मी के बीच बीते सोमवार को ''पंचायत आज तक 2022'' में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं अखिलेश यादव ने शिरकत की। योगी हैं तो यकीन है सेशन में सीएम ने कहा कि बीजेपी तीन चौथाई प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी। पिछले चुनाव में आप सीएम फेस नहीं थे, इस सवाल पर सीएम योगी ने कहा कि अभी चुनाव की तैयारी चल रही है। हमारी डबल इंजन की सरकार ने जो काम किया उसे लगातार बढ़ा रहे हैं।

महत्वपूर्ण ये है कि भारतीय जनता पार्टी जीतनी चाहिए, मुख्यमंत्री कोई भी बने। बीजेपी अपने मुद्दों पर चुनाव लड़ती है, सीएम योगी ने कहा कि हम जनता के हित में काम करेंगे, हमें कुर्सी की परवाह नहीं है। सीएम योगी ने कहा कि हमने प्रदेश में कानून व्यवस्था बदली है। पहले प्रदेश में क्राइम की बड़ी-बड़ी रिपोर्ट सामने आती थी। कैराना में लोगों का पलायन होता था, अब वहां लोग वापस आ रहे हैं। हमने प्रदेश में सुरक्षा देने का मौहाल बनाया है। हर नागरिक, बेटी, गरीब को सुरक्षा दी है। पहले जो माफिया थे, उनके खिलाफ बुलडोजर चला है और आगे भी चलेगा।

पंचायत आजतक के मंच पर अखिलेश ने की शिरकत

वहीं दूसरी तरफ 'पंचायत आजतक' के मंच पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शिरकत किया और उन्होंने सपा के परिवारवाद के सवाल पर कहा कि जिसका परिवार होगा, वही परिवार का दर्द समझेगा। बीजेपी द्वारा सपा पर लगाए जा रहे परिवारवाद के सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा लॉकडाउन के समय एक मां चलते-चलते आई थी ललितपुर। एक महिला गर्भवती थी, बेटी पैदा हुई। दो घंटे इंतजार किया और वो जाकर फिर अपने घर पहुंची। सरकार ने उस महिला की मदद नहीं की, मैं कहता हूं कि प्रदेश में समाजवादी सरकार होती तो मुझे चाहे डीएम की गाड़ी छीनकर देनी पड़ती उस मां के लिए मैं जरूर गाड़ी देता।

अखिलेश यादव ने कहा कि कोरोना लॉकडाउन के चलते जो मजदूर चलकर महाराष्ट्र से, गुजरात से आए. 90 मजदूरों की जान गई यूपी में, इस सरकार ने क्या मदद की एक भी मजदूर की। अगर किसी ने मदद की उनके परिवारों की तो समाजवादी लोगों ने उनके परिवार को एक-एक लाख की मदद दी। यह बात मैं इसलिए कहता हूं कि जो परिवार वाले होते हैं, वहीं परिवार का दुख दर्द समझ सकते हैं, क्या जवाब है सरकार के पास?

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