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रोग-राई ईडा पीडा घेऊन जागे मारबत, नागपुर में धूमधाम से निकली ‘काली-पीली मारबत’

September 10th, 2018 23:14 IST
रोग-राई ईडा पीडा घेऊन जागे मारबत, नागपुर में धूमधाम से निकली ‘काली-पीली मारबत’

डिजिटल डेस्क, नागपुर। देश का एकमात्र अनोखा उत्सव नागपुर में मनाया जाता है।  ‘मारबत’ और बड़ग्या सामाजिक बुराई और कुरीतियों पर प्रहार करते हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी निकाले गए।  बड़े पोले के दूसरे दिन शहर में काली-पीली मारबत निकलती है।  इस बार भूरी (सफेद) मारबत भी इसमें शामिल की गई है। मध्य नागपुर के नेहरू पुतले से काली मारबत और जागनाथ बुधवारी से पीली मारबत  निकली । मारबत के साथ बड़ग्या इसमें विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी मौजूदा समस्या, अनिष्ठ प्रथा और सामाजिक कुरूतियों पर प्रहार कर मारबत और बड़ग्या ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा।

मनपा की कार्रवाई पर प्रहार
इस बार शहर में अनधिकृत धार्मिक स्थलों के खिलाफ चल रही मनपा की कार्रवाई को बड़ग्या ने अपना निशाना बनाया । मस्कासाथ चौक स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज बड़ग्या समिति ने इसे मंदिरों को तोड़नेवाली मुगलशाही सरकार का नाम दिया।

महंगाई पर भी चोट
इसके अलावा महंगाई भी इसमें बड़ा मुद्दा है। बड़ग्या के मार्फत सिलेंडर एक हजार रुपए और रसोई गैस 100 रुपए करने की मांग कर सरकार पर कटाक्ष किया गया।

विकास कार्य पर कटाक्ष
लालगंज चकना चौक स्थित भाजपा बड़ग्या उत्सव समिति ने शहर में चल रहे विकास कार्य और भ्रष्टाचार पर बड़ग्या तैयार कर मनपा को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया।


अच्छे दिन का सपना
इसी तरह देश को अच्छे दिन का सपना दिखाने वाला बड़ग्या भी रैली में आकर्षण का केंद्र रहा।

दुष्कर्मी भी निशाने पर
 देश को शर्मसार करने वाले दुष्कर्मियों को भी निशाना बनाया गया।

...और भी हैं ज्वलंत मुद्दे
 ऐसे अनेक विविध ज्वलंत मुद्दों को लेकर मनपा, केंद्र व राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए उठाए गए।

काली - पीली के बाद अब भूरी मारबत ने ध्यान खींचा
ऐतिहासिक परंपरा में काली-पीली मारबत के साथ अब भूरी (सफेद) मारबत भी जुड़ गई है। पहली बार भूरी मारबत रैली में शामिल हुई। जेंडर इक्विलिटी आर्गनाइजेशन के सचिव व संस्थापक विक्रांत अंभोरे ने भूरी मारबत की संकल्पना लाई है। उनका कहना है कि  देश में भेदभावपूर्ण कानून (494-अ) घरेलू हिंसा, बलात्कार, विनयभंग, सीआरपीसी 125, तलाक, दहेज, चाइल्ड कस्टडी आदि का आधार अनेक झूठे प्रकरणों में पुरुषों को पुलिस द्वारा फंसाया जाता है। एनसीआरबी की रिपोर्ट अनुसार,  पारिवारिक कलह से देश में प्रत्येक 9 मिनट में 1 पुरुष आत्महत्या करता है। मारबत से प्रेरणा लेकर ऐसे पक्षपाती कानून और दुरुपयोग कर निर्दोष व्यक्तियों को फंसाने वालों का विरोध करने के लिए भूरी मारबत की संकल्पना  है।

मारबत उत्सव में छाए रहे मुद्दे
मारबत उत्सव परंपरागत तौर से यहीं से ही अन्य क्षेत्रों में फैला है। मारबत रैली निकाली गई। शहर भर में जगह जगह मारबत का पुतला फूंका गया था। लोग उत्सव का आनंद ले रहे थे। लिहाजा बंद प्रदर्शन को लोगों का भी सहयोग मिला। काली-पीली मारबत उत्सव में महंगाई, पीएनबी घोटाला, एसएनडीएल की ज्यादति के मुद्दे छाए रहे। शासन-प्रशासन की नीतियों पर करारा प्रहार किया गया। सबसे ज्यादा पेट्रोल, डीजल, सिलेंडर की बढ़ी कीमत को लेकर आक्रोश दिखा। पहली बार जेंडर इक्वलिटी ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से भूरी मारबत निकाली गई। इस माध्यम से महिलाओं के अत्याचारों को उजागर किया गया। महिलाओं के लिए बने कानून के दुरुपयोग को रोकने की मांग हुई।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।