मुंबई: डांडिया क्वीन फाल्गुनी पाठक के कार्यक्रम के खिलाफ दायर याचिका खारिज

September 23rd, 2022

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कांदिवली स्थित दिवंगत श्री प्रमोद महाजन स्पोर्टस कांप्लेक्स के मैदान के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। इस मैदान में डांडिया क्वीन के नाम से मशहूर गायक फाल्गुनी पाठक का नवरात्रोत्सव में 26 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच कार्यक्रम होना है। ऐसे में इस याचिका के खारिज होने के साथ ही फाल्गुनी पाठक के कार्यक्रम का रास्ता साफ हो गया है। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता व न्यायमूर्ति माधव जामदार की खंडपीठ ने कहा कि नवरात्री के अवसर पर डांडिया के कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते है लेकिन याचिकाकर्ता ने सिर्फ गायिका पाठक के कार्यक्रम को निशाना बनाया है। इस याचिका में हमें प्रमाणिकता का अभाव नजर आता है। इसलिए मौजूदा याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है। इस तरह से खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया। सामाजिक कार्यकर्ता विनायक सानप ने इस मुद्दे को लेकर कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।

याचिका में दावा किया गया था कि जिस जगह गायक पाठक के कार्यक्रम का आयोजन होना है। वह खेल के मैदान के रुप आरक्षित है। लेकिन इस मैदान की बुकिंग गायक पाठक के डांडिया कार्यक्रम के लिए किए जाने की जानकारी सामने आयी है। यह बुकिंग बिग ट्री इनटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से की जा रही है। कार्यक्रम में प्रवेश के लिए आठ सौ रुपए से लेकर चार हजार दो सौ रुपए की टिकट तय की गई है। इस तरह से मैदान का व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। जो की सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। इस मामले में मुंबई विभाग के खेल उपनिदेशक ने पक्षपात किया है। और आयोजकों बिना कोई निविदा मंगाए खेल का मैदान दस दिनों के लिए दे दिया है।  सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सरकारी वकील अभय पटकी ने कहा कि नियमों के तहत आयोजकों को खेल का मैदान दस दिनों के लिए दिया गया है। वहीं मैदान में डांडिया के आयोजकों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मुकेश वशी ने कहा कि मामले से जुड़ी याचिका प्रमाणिक नहीं है। कई आयोजकों को मैदान के इस्तेमाल की इजाजत दी गई है लेकिन याचिकाकर्ता ने सिर्फ मेरे मुवक्किल को निशाना बनाया है। जबकि याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि मेरे मुवक्किल का उद्देश्य सिर्फ मैदान की सुरक्षा करना है और कुछ नहीं। इस तरह खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया।