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आदिवासी बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाने की योजना टली

आदिवासी बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाने की योजना टली

डिजिटल डेस्क, मुंबई।  प्रदेश के आदिवासी विकास मंत्री के सी पाडवी ने आदिवासी विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम के नामांकित निवासी स्कूलों में दाखिला देने वाली योजना को शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए स्थगित करने के फैसले पर सफाई दी है।  पाडवी ने कहा कि इस योजना को अस्थायी तौर पर स्थगित किया गया है।  कोरोना संकट खत्म होने के बाद शैक्षणिक वर्ष के दूसरे सत्र में अक्टूबर- नवंबर से यह योजना शुरू की जा सकती है। पत्रकारों से बातचीत में पाडवी ने कहा कि योजना को स्थगिति देने का फैसला अस्थायी है।  इसको बाद में बदला जा सकता है।

 पाडवी ने कहा कि योजना के तहत अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को आदिवासी विभाग के दूसरे अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा। वहीं पहले से दाखिला पाने वाले 53 हजार विद्यार्थियों की अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू रहेगी। इससे पहले आदिवासी विकास विभाग ने 22 मई को शासनादेश जारी करके आदिवासी विद्यार्थियों को नामांकित निवासी स्कूलों में दाखिला देने वाली योजना को स्थगित करने का फैसला किया था। आदिवासी विभाग ने योजना को स्थगित करने के लिए कोरोना संकट को जिम्मेदार बताया है। इसकी वजह से निधि में कटौती हुई है। आदिवासी विभाग के इस फैसले से भाजपा के विधायकों और सांसदों ने नाराजगी व्यक्त की है

 विभाग खोलेगा नए 52 अंग्रेजी और सेमी अंग्रेजी स्कूल  
पाडवी ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके इसके लिए आदिवासी विकास विभाग नए 52 अंग्रेजी और सेमी अंग्रेजी स्कूल शुरू करेगा। अंग्रेजी माध्यम के इन स्कूलों के लिए शिक्षक नहीं मिलेंगे तो केरल समेत दूसरे प्रदेशों से शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। पाडवी ने कहा कि भाजपा सरकार ने अंग्रेजी माध्यम के नामांकित निवासी स्कूलों में 25 हजार आदिवासी विद्यार्थियों को दाखिला देने का फैसला किया था। लेकिन आदिवासी विभाग को कभी 25 हजार विद्यार्थी मिल ही नहीं सके। अंग्रेजी माध्यम के नामांकित निवासी स्कूलों में साल 2015-16 में 13474, साल 2016-17 में 16473, साल 2018-19 में 2849 और साल 2019-20 में 4272 आदिवासी विद्यार्थियों ने ही दाखिला लिया था। पाडवी ने कहा कि 25 हजार विद्यार्थियों को पढ़ाने का आंकड़ा केवल कागज पर ही सिमट कर रह गया। कई अंग्रेजी माध्यम के स्कूल आदिवासी विद्यार्थियों को केवल इसलिए प्रवेश देते हैं क्योंकि उन्हें सरकार की ओर से अनुदान मिलता है। वास्तव में कुछ अंग्रेजी माध्यम के नामांकित निवासी स्कूलों में आदिवासी बच्चों के साथ भेदभाव होता है। 

विद्यार्थियों के घर जाएंगे शिक्षक
 पाडवी ने कहा कि कोरोना संकट के कारण आदिवासी आश्रम स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा पद्धति में बदलाव करने का विचार है। शिक्षा विभाग की मदद से विद्यार्थियों के लिए दूरस्थ शिक्षा, मुक्त स्कूल शिक्षा और शिक्षकों को विद्यार्थियों को घर पर पढ़ाने के लिए भेजना पड़ेगा। आदिवासी विभाग के कक्षा पहली से बारहवीं तक के विद्यार्थी सभी किताबें पीडीएफ के रूप में डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए विद्यार्थी इस वेबसाइट http://cart.ebalbharati.in/BalBooks/ebook.aspx का इस्तेमाल कर सकते हैं। 
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।