दैनिक भास्कर हिंदी: अलग पहंचान बना रहा है गौरारी गांव, देशी खाद से हरी मिर्च का उत्पादन

February 26th, 2018

डिजिटल डेस्क छतरपुर । महाराजपुर क्षेत्र के गौरारी गांव की ख्याति अब पूरे बुंदेलखंड़ में देशी सब्जी की पैदावार  करने के रुप में जानी जाने लगी है। यहा की महिला स्वसहायता समूह ने वह कर दिखाया जो अभी तक पूरे बुंदेलखंड़ में किसी ने नहीं किया है। गांव की महिलाये पहले परंपरागत खेती के काम में पुरुषों का हाथ बटाती थी। लेकिन सब्जी उत्पादन से जुड़ कर महिलाएं अब पुरुषों से कॉफी आगे निकल चुकी है।

                       परंपरागत खेती को छोड़ कर महिलाएं अब आधुनिक तरीके से सब्जी की खेती कर अपना और अपने परिवार की आर्थिक स्थिती को मजबूत कर रही है। महिलाओं के जजबे को देख कर कृषि विज्ञान केंद्र और अन्य सरकारी विभागों के अफसर भी उनकी ममद के लिए आगे आ गए और सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में शासन की जो योजनाएं है। उनका लाभ भी महिलाओं को दिलाया गया। आज स्थिती यह है, कि गौरारी गांव  की सब्जी खास तौर से हरी मिर्च बुंदेलखंड सहित अन्य जिलों में बेचने के लिए भेजी जा रही है। तीखी मिर्च होने की वजह से इसकी डिमांड़ भी बढ़ गई है । डिमांड़ बढऩे से मिर्च की खेती कर रहीं महिलाओं में खेती के प्रति पहले की अपेक्षा और अधिक उत्साह बढ़ गया है। सब से खास बात यह है, कि सब्जी के उत्पादन में कैमिकल खाद का उपयोग नहीं किया जाता बल्कि देशी खाद से ही सब्जी का उत्पादन किया जा रहा है। टमाटर, सहित अन्य हरी सब्जियों का होगा उत्पादन वर्तमान में हरी मिर्च का उत्पादन किया जा रहा है। रही मिर्च के उत्पाद की सफलता से उत्साहित महिलाएं  अब अपने खेतों में टमाटर, बैगन, लौकी, हरीधनिया, सहित अन्य सीजनेवाल सब्जीयों का उत्पादन करने में जुट गई है। उनका कहना है, कि उन्हे भरोसा ही नहीं हो रहा है, कि उनके द्वारा तैयार की गई हरी मिर्च पूरे बुंदेलखंड़ में पसंद की जा रही है। कुछ महिलाओं ने टमाटर की खेती शुरु कर दी है, माना जा रहा है, कि जल्द ही शहर के लोगों को स्वादिष्ट टमाटर सस्तेदर पर मिलने लगेंगे। सब्जी की खेती को बढ़ावा देने के लिए बैंक और संघमित्रा के द्वारा आजीविका गतिविधि भी सहयोग के लिए खुल कर आगे आ गए है। जिन महिलाओं की आर्थिक स्थिती ठीक नहीं थी उन्हे बैंक से लोन दिलाया गया।
एक पेड़ में उगती है 70 मिर्च
देशी खाद से उगाई गई हरी मिर्च भी अच्छा उत्पादन दे रही है। मिर्च के एक पेड़ से 70 से 75 मिर्च निकल रही है। वैज्ञानिक तकनीक से हो रही मिर्च की खेती को देखने के लिए आस पास के गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में प्रति दिन गौरारी पहुंच रहे है। गौरारी गांव की महिलाओं की मेहनत को देख कर दूसरे गांव के लोग भी प्रेरित हो रहे है। दूसरे गांव के लोग भी सब्जी उत्पादन की तकनीक को सीख रहे है। ताकि वे भी अपने गांव में सब्जी की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिती को मजबूत कर सके।  सब्जी उत्पादन में लगी महिलाओं का कहना है, कि उनका प्रयास है, कि समूचे मध्यप्रदेश में गौरारी तेजस्वनी सब्जी के नाम से जाना जाए। देशी खाद का होता है उपयोग देशी सब्जी उत्पादन की सब से खास बात यह है, कि सब्जी में कैमिकल युक्त खाद का उपयोग नहीं किया जाता है।