दैनिक भास्कर हिंदी: नक्सल समर्थन के मामले में उम्रकैद की सजा भुगत रहा प्रो. साईबाबा इलाज कराने अपने डॉक्टर से लेगा सलाह

October 10th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  नक्सल समर्थन के मामले में दोषी पाए गए प्रोफेसर जी.एन. साईबाबा को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने नागपुर में इलाज कराने के पूर्व हैदराबाद के अपने निजी डॉक्टर से सलाह लेने की अनुमति दी है। उसने इस संबंध में हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने उसे इस बात की अनुमति दी है। हाईकोर्ट ने अहेरी पुलिस को वर्ष 2014 से लेकर अब तक की साईबाबा की मेडिकल रिपोर्ट उसे सौंपने को कहा है।  

नागपुर मध्यवर्ती कारागृह में प्रो. जी.एन. साईबाबा उम्रकैद की सजा काट रहा है। साईबाबा ने हाईकोर्ट में गडचिरोली सत्र न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है। बता दें कि, साईबाबा को गॉल ब्लैडर की शिकायत है। पुलिस उसके इलाज की तैयारी कर रही है। पूर्व में साईंबाबा ने बगैर पत्नी से विमर्श किए इलाज कराने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद कोर्ट ने पत्नी को साईबाबा से जेल में मिलने की अनुमति दी थी। मामले में सरकार की ओर से विशेष सरकारी वकील पी. सत्यनाथन ने पक्ष रखा। 

यह था मामला
साईबाबा ने हाईकोर्ट में गडचिरोली सत्र न्यायालय के फैसले को हाइकोर्ट में चुनौती दे रखी है। इसी याचिका के साथ उसकी पत्नी की अर्जी भी जोड़ी गई थी। बता दें गड़चिरोली जिला व सत्र न्यायालय ने प्रो. जी.एन. साईबाबा और अन्य पांच को नक्सलियों की मदद करने का दोषी पाया है। न्यायालय ने प्रोफेसर साईबाबा, हेम मिश्रा, प्रशांत राही, महेश तिरकी, पांडू नरोटे को उम्रकैद और विजय तिरकी को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। निचली अदालत ने देश विरोधी गतिविधियों और प्रतिबंधित संगठन के सदस्य होने का दोषी पाया था। गड़चिरोली पुलिस ने दिल्ली के जेएनयू विश्वविद्यालय के विद्यार्थी हेम मिश्रा को अगस्त 2013 में महेश तिरकी और पांडू नरोटे के साथ अहेरी से गिरफ्तार किया था। हेम मिश्रा से पूछताछ के बाद पुलिस ने सितंबर 2013 में प्रशांत राही काे भी गिरफ्तार किया। नक्सली नेता गणपति व नर्माद अक्का और प्रोफेसर साईबाबा के बीच मध्यस्थता करने का दावा पुलिस की ओर से किया गया। 23 दिसंबर 2015 को साईबाबा ने भी आत्मसमर्पण कर दिया था।