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सीजीएसटी का अजब-गजब कामकाज, तीन साल बाद भी नहीं मिला प्रमोशन का लेटर

सीजीएसटी का अजब-गजब कामकाज, तीन साल बाद भी नहीं मिला प्रमोशन का लेटर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। सरकार के एक विभाग से दूसरे विभाग में पहुंचे पत्र को मंजूरी मिलने में कितना समय लग जाता है, इसका अंदाजा सेंट्रल जीएसटी नागपुर द्वारा सेंट्रल जीएसटी भोपाल को भेजे गे पत्र के हश्र से लगाया जा सकता है।  सीजीएसटी के 16 अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ देने संबंधी पत्र सेंट्रल एक्साइज एंड जीएसटी नागपुर ने मंजूरी के लिए 3 सितंबर 2015 को भोपाल मुख्य आयुक्तालय भेजा था, जिस पर अब तक फैसला नहीं हो सका है। इधर एक अधिकारी की रिटायर होने के बाद उनकी मृत्यु  हो गई और कई अधिकारी रिटायर  की उम्र तक पहुंचते आ रहे हैं। 

ऐसे हुआ पत्र का हश्र
जानकारी के अनुसार सेंट्रल एक्साइज, जीएसटी एंड कस्टम्स में कार्यरत अधीक्षक व इंस्पेक्टर स्तर के 16 अधिकारियों को समय पर पदोन्नति नहीं मिली थी। पदोन्नति नहीं देने पर पदोन्नति के हितलाभ दिए जाते हैं। अधिकारियों ने अपने अधिकार के लिए आवाज उठाने पर विभाग ने इसे सही मानते हुए 16 अधिकारियों का एश्योर्ड करियर प्रोग्रेसन (एसीपी) तैयार किया और इसे अंतिम मंजूरी के लिए सितंबर 2015 में सीजीएसटी भोपाल मुख्य आयुक्तालय भेजा था। तीन साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद इसे मंजूरी नहीं मिली।  विभाग द्वारा भेजे गए पत्र का यह हश्र सरकारी कामकाज की प्रक्रिया बताने के लिए काफी है। इस बीच सीजीएसटी नागपुर में पदस्थ अधीक्षक आर. सी. हिंगोराणी 2017 को रिटायर्ड हो गए। 2018 में उनकी मृत्यु हो गई। पदोन्नति की उनकी आस अधूरी रह गई। बाकी बचे 15 अधिकारी एसीपी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इनमें से कुछ अधिकारी एक दो साल में रिटायर होने वाले हैं।

दस्तावेजों की जांच पड़ताल  होगी
यह 3 साल पुराना मामला है। एसीपी देने के संबंध में अधिकारियों के दस्तावेजों की जांच पड़ताल की जाएगी। पुरानी फाइलों को देखा जाएगा, अगर उनका दावा पुख्ता है, तो संबंधित अधिकारियों को एसीपी दी जाएगी। मामला अब तक क्यों पड़ा रहा, यह भी देखा जाएगा। 
- रणजीतकुमार, अतिरिक्त आयुक्त,  सेंट्रल एक्साइज एंड जीएसटी, भोपाल
 
 

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