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महाराष्ट्र भाजपा में शीघ्र फेरबदल, बावनकुले, पोटे, फुके को मिल सकती है जिम्मेदारी

महाराष्ट्र भाजपा में शीघ्र फेरबदल, बावनकुले, पोटे, फुके को मिल सकती है जिम्मेदारी

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  महाविकास आघाड़ी के नेतृत्व की सरकार के विरोध में आंदोलनकारी कदम बढ़ा रही प्रदेश भाजपा में जल्द ही संगठनात्मक फेरबदल किया जा सकता है। प्रदेश के अलावा जिला स्तर पर कमेटियों का विस्तार किया जाएगा। इस पुनर्गठन की प्रक्रिया में कुछ नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारी मिल सकती है। इनमें विदर्भ से चंद्रशेखर बावनकुले, प्रवीण पोटे व परिणय फुके के नामों पर प्रमुखता से चर्चा हो सकती है। पार्टी के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी के अनुसार यह मानकर चला जा रहा है कि दीपावली के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हो सकता है। 105 विधायकों वाली भाजपा में यह बात जोर पकड़ रही है कि सबसे अधिक विधायक होने के बाद भी विपक्ष में रहना ठीक नहीं है।  देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में 5 वर्ष तक भाजपा राज्य में सत्ता में रही। लंबे समय से सत्ता संघर्ष करती रही भाजपा में उस समय भी ऐसे कई नेता व कार्यकर्ता थे जो सत्ता समायोजन में स्वयं को शामिल कराना चाहते थे।

शहर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के नामों की नहीं हुई घोषणा 
संगठन पर अधिक जोर : विधानपरिषद के चुनाव में नेताओं व कार्यकर्ताओं का असंतोष साफ महसूस किया गया है। ऐसे में भाजपा संगठन पर अधिक जोर देने वाली है। माना जा रहा है कि जुलाई के पहले सप्ताह में ही संगठन विस्तार हो जाएगा। चंद्रकांत पाटील को फरवरी में दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वे जल्द ही कार्यकारिणी का विस्तार करने वाले थे। लेकिन लाकडाउन के कारण कार्यकारिणी विस्तार का मामला लंबित रह गया। लिहाजा अब तक सचिव, उपाध्यक्ष, महासचिव ,कोषाध्यक्ष जैसे पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाई है। विविध आघाड़ियों के पदाधिकारी भी नियुक्त नहीं हुए हैं।

यह है संभावना
विधानपरिषद चुनाव में उम्मीदवार बनने से चूके कुछ नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी मिल सकती है। पूर्व विधायक मेधा कुलकर्णी के अलावा फडणवीस मंत्रिमंडल के अंतिम विस्तार में जगह पाने वाले आशीष शेलार को भी संगठन में मौका दिया जा सकता है। प्रदेश भाजपा के कोविड अभियान के प्रमुख रहे चंद्रशेखर बावनकुले का भी नियोजन होना बाकी है। इन्हें महामंत्री की जिम्मेदारी मिल सकती है। विदर्भ से जिन नेताओं को संगठन में स्थान मिलने की संभावना है उनमें पूर्व राज्यमंत्री परिणय फुके व प्रवीण पोटे शामिल है। 

कार्यकारिणी का भी विस्तार
भाजपा की शहर कार्यकारिणी में भी विस्तार का विषय लंबित है। प्रवीण दटके के शहर अध्यक्ष बनने के बाद मंडल अध्यक्षों व मंडल महामंत्रियों के नामों की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन शहर कार्यकारिणी में महामंत्री के अलावा अन्य पदाधिकारियों के नामों की घोषणा नहीं की गई है। संकेत िदए जा रहे हैं कि 2022 में होने वाले मनपा चुनाव की तैयारी को देखते हुए संगठन में नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।