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रायपुर : कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ‘विहान’ समूह की महिलाएं दे रहीं योगदान

July 24th, 2020 16:17 IST
रायपुर : कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ‘विहान’ समूह की महिलाएं दे रहीं योगदान

डिजिटल डेस्क, रायपुर, 22 जुलाई 2020 कोविड-19 के संक्रमण काल में आज हर वर्ग कोरोना से जंग लड़ रहा है। ऐसे दौर में बिलासपुर जिले के वनांचल ग्राम करही कछार की आदिवासी महिलाएं भी पीछे नहीं है। विहान समूह से जुडी ये महिलाएं हैण्ड सेनिटाइजर, फिनाईल, सेनेटरी नेपकिन, टॉयलेट क्लिीनर जैसी उपयोगी चीजें बनाकर अस्पताल, मेडिकल स्टोर, मितानिन और गांव की महिलाओं तथा ग्रामीणों को उपलब्ध करा रही हैं और संक्रमण से बचाव और स्वच्छता के लिए अपना योगदान दे रही हैं। इससे इन महिलाओं को रोजगार मिलने के साथ अच्छी आय प्राप्त हो रही है। अब तक वे एक लाख रूपए से ज्यादा की सामग्री बेच चुकी है। उन्होनें बैंक से लिये गये ऋण को 10 माह में ही चुकता कर दिया है। उनके कार्य को देखते हुए उन्हें पुनः एक लाख रूपए का ऋण दिलाया गया है। साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 15 हजार की प्रोत्साहन राशि रिवाल्विंग फंड के रूप में उन्हें दी गयी है। कोटा विकासखंड के आदिवासी उरांव समाज की 10 महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत विहान समूह से जुड़ी हैं। इन महिलाओं ने वर्ष 2010 में सिद्ध बाबा महिला स्व सहायता समूह का गठन किया था। समूह की अध्यक्ष श्रीमती चंदा बाई उरांव के नेतृत्व में ये महिलाएं पहले छोटी-छोटी बचत कर आपस में ही लेन देन का कार्य कर रही थीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विहान से उन्हें गत वर्ष जोड़ा गया। समूह को एक लाख रूपए का ऋण बेलगहना के स्टेट बैंक से उपलब्ध कराया गया। जन स्वास्थ्य सहयोग केंद्र गनियारी द्वारा महिलाओं को फिनाई,टायलेट क्लिीनर, डिश वाश, बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। सेनेटरी पेड बनाने के लिए उन्हें हैदराबाद की संस्था से प्रशिक्षण दिलाया गया तथा रोटरी क्लब द्वारा उन्हें गांव में ही सेनेटरी पेड बनाने की मशीन उपलब्ध करायी गयी। प्रशिक्षण के बाद समूह ने बैंक से मिले लोन से कच्चा माल खरीदकर उससे सामग्री तैयार करना शुरू किया। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए हैण्ड सेनिटाइजर बनाने का प्रशिक्षण भी उन्होनें लिया और उसका भी उत्पादन शुरू कर दिया। उनके द्वारा उत्पादित सामाग्री को बाजार से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। महिलाएं अस्पताल, मेडिकल स्टोर में जाकर उनके मांग अनरूप सामान की आपूर्ति कर रही है। वहीं आसपास गांवों के मितानिनों, महिलाओं, और ग्रामीणों के घर तक सामग्री पहुंचा रही है। क्रमांक 2779/रीनू

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।