दैनिक भास्कर हिंदी: काशी में  गंदगी और बदबू से राम-लक्ष्मण को हुई उल्टियां...

October 8th, 2018

डिजिटल डेस्क,लखनऊ। नवरात्रि शुरू होने वाली है और जगह-जगह रामलीला की जा रही है। दशहरे तक रावण को जलाकर मारना भी तो है, लेकिन ये क्या कलयुग में तो राम-लक्ष्मण का रावण को मारना तो दूर, रामलीला तक करना दूभर हो गया। दरअसल उत्तर प्रदेश के काशी (बनारस ) शहर में रामलीला खेली जा रही थी, लेकिन स्टेज पर ही कुछ ऐसा हुआ कि राम-लक्षमण को उल्टियां होने लगीं। वजह थी स्वच्छ भारत में फैली गंदगी।

 

तालाब की बदबू से होने लगीं उल्टियां

बता दें कि काशी में धनेसरा तालाब किनारे रामलीला का मंचन किया जा रहा था। इस दौरान तालाब से आ रही दुर्गंध से राम-लक्ष्मण की तबीयत खराब हो गई है और उन्हें उल्टियां होने लगी। जिसके बाद राम-लक्ष्मण धरने पर बैठ गए। राम-लक्ष्मण के साथ उस वक्त रामलीला के अन्य पात्र भी मौजूद थे। मामला इतना बढ़ा कि अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा और अंत में रविवार से तालाब की सफाई और अतिक्रमण हटाने का आश्वासन मिला तब जाकर किसी तरह मामला शांत हुआ।दर्शक यहां ऐतिहासिक 'लाट भैरो रामलीला' का 'राम-केवट संवाद' देखने गए थे, लेकिन उन्हें रामलीला तो नहीं पर धरना जरूर देखने को मिला।

 

16वीं सदी से हो रही है लाट भैरव रामलीला

रिपोर्ट के मुताबिक यहां 16वीं सदी से लाट भैरव रामलीला हो रही है। आमतौर पर ये अधमपुरा के लाट भैरव मंदिर में होती है। दो चीजों- केवट संवाद और जिसमें केवट राम, लक्ष्मण और सीता को गंगा के पार लेकर जाते हैं। नाटक को वास्तविक दिखाने हेतु राम-केवट के मध्य के संवाद के मंचन को तालाब में किया जाता है किन्तु जब केवट राम, लक्ष्मण व सीता को गंगा पार कराने गए तो तालाब बहुत कूड़े से भरा पड़ा था साथ ही उससे काफी बदबू भी आ रही थी।

गंदगी का आलम कुछ यूं था कि दोनों मुख्य किरदारों को उल्टियां आने लगीं, लिहाजा वो सब कुछ छोड़छाड़ कर धरने पर बैठ गए। जिससे क्रोधित होकर व धरने पर बैठ गए। इस धरने के चलते कमिटी के अध्यक्ष राम अवतार पांडे वहां पर पहुंचे। उन्होंने शीघ्र ही नगर पालिका आयुक्त को फोन किया। दो घंटों तक मनाने-समझाने के बाद रामलीला शुरू हुई।