दैनिक भास्कर हिंदी: इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के लिए बना क्षेत्रीय भाषा का सॉफ्टवेयर

May 24th, 2021

डिजिटल डेस्क, नागपुर। अंग्रेजी भाषा का ज्ञान न होने के कारण अब किसी भी विद्यार्थी को इंजीनियरिंग की पढ़ाई से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। अखिल भारतीय तंत्र शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने  इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया है। इसमें विद्यार्थियों को क्षेत्रीय भाषा में पाठ्यसामग्री उपलब्ध होगी। 

बता दें कि एआईसीटीई ने देश की सभी 22 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने का निर्णय लिया है। इस योजना को चरणबद्ध तरीके से साकार किया जाएगा। पहले चरण में डीम्ड यूनिवर्सिटी और कॉलेजों और एनबीए मूल्यांकन प्राप्त इंजीनियरिंग कॉलेजों को ही क्षेत्रीय भाषा में इंजीनियरिंग कराने की अनुमति दी जाएगी। जानकारी के अनुसार, एआईसीटीई को इस योजना के लिए अनेक शिक्षा संस्थानों की ओर से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। हालांकि एआईसीटीई ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अंग्रेजी का ग्रेडेड पाठ्यक्रम भी पढ़ना होगा, ताकि वे प्रतिस्पर्धा के युग में कहीं पीछे न रहें। विद्यार्थियों को क्षेत्रीय भाषा में पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने के लिए संबंधित भाषा में पाठ्यक्रम का अनुवाद होगा।

सर्वे करके जाना था विद्यार्थियों का मत
एआईसीटीई ने यह फैसला लेने के पूर्व देशभर में सर्वेक्षण किया था, जिसमें करीब 42 प्रतिशत विद्यार्थियों ने उनके राज्य की भाषा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की मंशा जाहिर की थी। विद्यार्थियों के अनुसार स्थानीय भाषा में वे जटिल कांसेप्ट बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और अपने विचार भी बेहतर ढंग से व्यक्त कर सकते हैं।

स्थानीय भाषा का होता अधिक उपयोग
यह देखने में आया है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब विद्यार्थी नौकरी करते हैं, तो संवाद की भाषा अंग्रेजी नहीं होती, बल्कि कुछ मशीनों और प्रक्रियाओं के लिए ही अंग्रेजी भाषा का प्रचलन है। बाकी वक्त तो स्थानीय भाषा का ही प्रयोग होता है। ऐसे में यदि विद्यार्थियों को स्थानीय भाषा में ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई जाए, तो उनकी रचनात्मकता और खिलेगी। वे और बेहतर ढंग से पाठ्यक्रम समझ पाएंगे। इसी कारण से एआईसीटीई ने क्षेत्रीय भाषा में भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने का फैसला लिया है।
- डॉ. राजेंद्र काकडे, सलाहकार, अखिल भारतीय तंत्र शिक्षा परिषद