comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

राहत : पिछले पांच सालों में कम हुए मलेरिया के मरीज, ग्रामीण में केवल एक मौत

राहत : पिछले पांच सालों में कम हुए मलेरिया के मरीज, ग्रामीण में केवल एक मौत

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  कोरोना महामारी को रोकने के लिए जिला प्रशासन और आरोग्य विभाग लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी तरह नागरिकों ने भी इस बीमारी को गंभीरता से लेते हुए स्वच्छता पर ध्यान देना शुरू किया है। कोरोना के अलावा स्वास्थ विभाग ने मलेरिया को नियंत्रित करने के लिए भी प्रयास किया। जिसके परिणाम स्वरूप 2021 में जिले में केवल 3 मलेरिया के मरीज मिले। इसी तरह पिछले पांच साल में केवल 1 ही मरीज की मलेरिया से मृत्यु हुई है। इसके साथ साल दर साल मलेरिया के मरीजों की संख्या भी कम हुई है।

दो तरह के पैरासाइट की होती है जांच
मलेरिया बीमारी मादा एलाफिलीज मच्छर के काटने से होती है। इसमंे बुखार, ठंड लगना, कंपकपी, हाथ पैरो में दर्द जैसे लक्षण हाेते हैं। यह मच्छर साफ पानी में पैदा हाेता है। यह मच्छर मनुष्य को काटता है और खून मंे परजीवी यानि पैरासाइट छोड़ देता है। जो कि मलेरिया कहलाता है। मलेरिया के दौरान दो तरह के पैरासाइट की जांच की जाती है। यह दोनों अलग-अलग तरह के होते हैं जिससे मलेरिया होता है। एक होता है प्लास्मोडियम वायएक्स और दूसरा प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम होता है। इसमें प्लाजमोडियम वायएक्स पैरासाइट होता है मरीज को 14 दिन का इलाज जरूरी होता है जबकि प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम में 3 दिन का इलाज किया जाता है।

जांच कर लिए जाते हैं खून के नमूने
इसकी रोकथाम के लिए हर 15-15 दिन में अलग-अलग गांवों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को बुखार ठंड और अन्य लक्षण होते हैं तो उनके खून के नमूने लिया जाते हैं। उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाता है। इसके बाद मरीजों को इलाज दिया जाता है। 2020 में तीन में से केवल एक मरीज नागपुर ग्रामीण भाग का था। जबकि दो मरीजों में से एक सतारा और दूसरा मुंबई का था।

गड्ढों के पानी से भी लेते हैं सैंपल
मलेरिया के लार्वा की जांच के लिए बारिश के दिनों हर क्षेत्र में स्वास्थ विभाग यानि प्राथमिक उपचार केंद्र या अन्य स्वास्थ कर्मी खुले गड्ढे और अन्य पानी जमा होने वाली जगहों से सैंपल लेते हैं। उस सैंपल की जांच करते हैं। यदि उसमें लार्वा की पहचान होती है तो फिर उस गड्ढे को बुझाने के लिए ग्रामपंचायत को कहते हैं। जिसके बाद ग्रामपंचायत उसे बुझाती है। इस तरह समय-समय पर यह जांच की जाती है।

लगातार किया जाता है सर्वे
मलेरिया की रोकथाम के लिए लगातार सर्वे किया जाता है। साथ ही खून के नमूने भी लिए जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप हर साल मरीजों की संख्या भी कम हुई है। साथ ही पिछले पांच साल में ग्रामीण भाग में केवल 1 व्यक्ति की मौत हुई है। डॉ. राहूल गायकवाड, जिला हिवताप अधिकारी 

कमेंट करें
fpQPm