दैनिक भास्कर हिंदी: ट्रेन से हो रही थी मानव तस्करी, RPFने 35 नाबालिगों को छुड़वाया

March 27th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। ट्रेन से मानव तस्करी का मामला उस समय सामने आया जब आरपीएफ की नजर कुछ बच्चों पर पड़ी। संदेह होने पर पूछताछ की गई तो और बच्चे ट्रेन में होने की बात पता चली।  आरपीएफ ने एक रेस्क्यू ऑपरेशन कर 35 बच्चों को सुरक्षित छुड़ाने में सफलता हासिल की। इन बच्चों को बिहार से सिकंदराबाद-दानापुर ट्रेन में ले जाया जा रहा था। रेलवे पुलिस को शक है कि इन बच्चों को मानव तस्करी के लिए ले जाया जा रहा था। आरोप यह भी है कि इन बच्चों का यौन शोषण भी किया जा रहा था। इन बच्चों को पुलिस ने मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेज दिया है। इन बच्चों को लालच देकर सिकंदराबाद ले जा रहे 7 युवकों को पकड़ा गया है। आरपीएफ ने उक्त नाबालिग बच्चों और 7 युवकों को जीआरपी के हवाले कर दिया है। बच्चों की उम्र 12 से 18 वर्ष बताई गई है। 

गरीब बच्चों को लालच देकर ले जा रहे थे
रेलवे पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को एक  चाइल्ड लाइन के नेतृत्व में ट्रेन नंबर 12792 दानापुर- सिकंदराबाद एक्सप्रेस को नागपुर रेलवे स्टेशन पर करीब 25 मिनट तक रोककर रखा गया। इस दौरान ट्रेन में विशेष रेस्क्यू कर आरपीएफ ने 35 नाबालिग बच्चों को छुड़ाया। ये गरीब बच्चे कमाने की चाह में घर से निकल पड़े थे। इनमें अधिकांश बच्चे बिहार के दानापुर, बनिया और खगड़िया के रहने वाले हैं। 

संदेह में ‘आधार’ कार्ड
ट्रेन से छुड़ाए गए कई नाबालिग बच्चों में से अधिकांश के  आधार कार्ड पर   1/ 1 यही तारीख और महीना लिखा है। वर्ष की जगह पर क्रमश: 1999, 2000 और 2001 लिखा गया है।  मजे की बात तो यह है कि 16 बच्चों के आधारकार्ड में जन्म तारीख और पैदाइश का महीना एक ही है। इससे संदेह और गहरा गया है।  

हैंडलर की सूची जीआरपी के पास
नाबालिग बच्चों को बहला फुसलाकर ले जाने वाले  ‘हैंडलर’ की जानकारी रेलवे चाइल्ड लाइन की ओर से जीआरपी को दी गई है। इस मामले की आगे की जांच जीआरपी करेगी। रेस्क्यू आपरेशन के लिए पूर्व सूचना देने के बाद भी जीआरपी से मदद नहीं मिलने की बात रेलवे चाइल्ड लाइन द्वारा किए जाने की चर्चा है। चर्चा यह भी है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बच्चों के लिए भोजन मंगाया गया था। वह भोजन निकृष्ट दर्जे का था, जिससे बच्चों ने भोजन ही नहीं किया।

फोन से सामने आया मामला
रेलवे चाइल्ड लाइन की हेल्पलाइन पर सोमवार की रात एक एनजीओ ने फोन कर बताया िक 40 बच्चों को बिहार से दानापुर-सिकंदराबाद ट्रेन में ले जाया जा रहा है। मंगलवार को नागपुर आरपीएफ के अधिकारियों ने कुछ आरपीएफ के जवानों को सादे वेश में नरखेड़ स्टेशन से ट्रेन में बैठाया। आरपीएफ के इन जवानों ने ट्रेन में रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया। इधर, रेल अधिकारियों ने जिला बाल कल्याण कक्ष को सूचित किया। विभागीय रेलवे व्यवस्थापक सोमेशकुमार ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी पर ट्रेन को रोकने का आदेश दिया। आरपीएफ ने इस ट्रेन से 26 बच्चों को नागपुर रेलवे स्टेशन पर उतारा। 

ट्रेन के आगे निकलने पर कुछ और बच्चों के होने की जानकारी मिली। तब बल्लारशाह स्टेशन पर 9 बच्चों को उतारा गया। इन बच्चों में 12 बच्चे बडनेरा में सीमेंट कारखाने, कुछ सिकंदराबाद में पेंटिंग के काम के लिए और कुछ स्टील उद्योग में काम पर ले जाए जा रहे थे। 

सभी बच्चे जीआरपी के हवाले 
कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद आपीएफ ने सभी बच्चों को जीआरपी के हवाले कर दिया। इन बच्चों को "वरदान' सामाजिक संस्था के मार्फत सकुशल छुड़ाया गया। संस्था की गौरी शास्त्री देशपांडे ने बताया िक इन बच्चों को शासकीय बालगृह में भेजा जाएगा। उसके बाद बुधवार को इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। 

इन्होंने कार्रवाई में लिया भाग
रेस्क्यू ऑपरेशन में स्टेशन संचालकों के निर्देश पर उपस्टेशन व्यवस्थापक कार्यालय के कर्मचारी, टिकट चेकिंग अधिकारी, कर्मचारी, रेलवे सुरक्षा दल के जवानों ने भाग लिया। मंडल सुरक्षा आयुक्त आरपीएफ के आशुतोष पांडे के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई। सहायक सुरक्षा आयुक्त दीपक सिंह चौहान, निरीक्षक एसी सिन्हा, उपनिरीक्षक जीएस एडले, सरनामसिंह यादव, उषा तिग्गा, विकास शर्मा, शेख शकील, दीपक पवार व अन्य ने सहयोग किया।