यूएलबी: कचरा मुक्त शहरों के प्रबंधन में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने की योजना

March 1st, 2022

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कचरा मुक्त शहरों के लिए सामाजिक उद्यम अपशिष्ट प्रबंधन में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है। शहरी विकास मंत्री, छत्तीसगढ़, रायपुर नगर निगम के मेयर, एमओएचयूए के सचिव और छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव इसके लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के साथ विशेष कार्यक्रम में भाग लेने जा रहे हैं।

3 मार्च 2022 को कचरा मुक्त शहरों के लिए सामाजिक उद्यम अपशिष्ट प्रबंधन में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करना विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

मिशन की क्षमता निर्माण पहल के हिस्से के रूप में, दिन भर चलने वाला यह विशेष आयोजन राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए विभिन्न केंद्रीकृत और विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं पर सहकर्मियों को सीखने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा।

इस कार्यक्रम में एसबीएम-शहरी 2.0 के अंतर्गत कचरा मुक्त शहरों के लिए राष्ट्रीय क्षमता निर्माण कार्य योजना जारी की जाएगी, जो देश में शहरी स्वच्छता क्षेत्र को मजबूत करने के लिए संबंधित हितधारकों की क्षमता निर्माण करने में मदद करेगा।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के मुताबिक इस कॉन्क्लेव में पूर्वोत्तर राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड तथा जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़ और लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों और मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे प्रमुख राज्यों सहित लगभग 17 राज्यों और उनके यूएलबी के प्रतिनिधियों के भाग लेने की आशा है, जिसमें प्रतिभागियों को शामिल करने के लिए कई गतिविधियां शामिल होंगी।

इसका शुभारम्भ एक अलग नोट पर होगा, जिसमें प्रतिभागी एनसीसी कैडेटों के साथ महानदी के तट पर जमीनी स्तर पर सफाई अभियान में शामिल होंगे। इसके बाद पास के पाटन में ठोस तरल संसाधन प्रबंधन (एसएलआरएम) केंद्र का दौरा किया जाएगा।

घरों से एकत्र किए गए अलग-अलग कचरे को एसएलआरएम केंद्र में लाया जाता है, जहां अकार्बनिक (सूखा गैर-जैविक-अपघट्य) अंशों को बाद में रीसाइक्लिंग के लिए विभिन्न उपश्रेणियों में क्रमबद्ध किया जाता है।

प्रतिभागी एसएलआरएम केंद्र में श्रमदान में शामिल होंगे और कुछ सूखे कचरे को भौतिक रूप से आगे के अंशों में छांटेंगे, ताकि उन्हें कचरे से अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए बाद में निपटान में आसानी के लिए इस तरह के कई छंटाई और अलगाव के महत्व के बारे में जागरूक करने में मदद मिल सके।

इसके बाद, प्रतिभागियों को रायपुर में अलग-अलग गीले कचरे से खाद बनाने के लिए वैज्ञानिक, मूल्य वर्धित प्रसंस्करण का प्रदर्शन दिखाने के लिए एक वर्मी-कम्पोस्टिंग केंद्र और एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र के क्षेत्रीय दौरे पर ले जाया जाएगा।

इस आयोजन का मुख्य आकर्षण देश भर से विभिन्न महिलाओं के नेतृत्व वाली कचरा प्रबंधन पहल की प्रस्तुतियां होंगी। उदाहरण के लिए, बंगलौर स्थित एक संगठन हसीरू डाला, कचरा बीनने वालों को कचरा उद्यमियों में बदलने के लिए काम करता है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता और आजीविका में सुधार करने में मदद मिलती है।

ओडिशा में कटक नगर निगम ट्रांसजेंडर के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को अपशिष्ट संचालकों के रूप में शामिल करके आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए काम कर रहा है। स्वच्छ सहकारी द्वारा पुणे का रेड डॉट अभियान सैनिटरी कचरे के सुरक्षित और स्थायी निपटान के साथ-साथ मासिक धर्म स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए काम कर रहा है।

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में, महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों ने एसएचई टीमों को झुग्गी बस्तियों में सामुदायिक शौचालयों के संचालन और रखरखाव और झुग्गी समुदायों में स्वस्थ स्वच्छता और स्वच्छता प्रथाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उद्यमशील उपक्रम स्थापित किए हैं। हरियाणा के गुरुग्राम में, साहस स्व-सहायता समूह, नगर निगम के सहयोग से अलग करो अभियान- हर दिन तीन बिन की अगुवाई कर रहा है।

इस अभियान के अंतर्गत नगरपालिका के ठोस कचरे को स्रोत पर ही तीन भागों - गीला (बायो-डिग्रेडेबल), सूखा (गैर-बायोडिग्रेडेबल) और घरेलू खतरनाक - आवासीय समुदायों के कचरे में अलग करने के लिए जागरूकता पैदा की जा सके।

(आईएएनएस)