दैनिक भास्कर हिंदी: पानसरे-दाभोलकर मर्डर केस में हुई और आरोपियों की पहचान

February 15th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद पानसरे और नरेंद्र दाभोलकर मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने बांबे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि उसने इस मामले में और संदिग्ध आरोपियों की पहचान की है लेकिन अब तक उसे इन आरोपियों को पकड़ने में सफलता नहीं मिली है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा, SIT व नरेंद्र दाभोलकर मामले की जांच कर रही सीबीआई आरोपियों से अधिक चतूर बनकर उन्हें मात दे। यदि इस हत्यकांड से जुड़े आरोपियों को दंडित नहीं किया गया तो इससे अपराधियों का हौसला व उत्साह बढेगा। विचारकों व चिंतको की हत्या पर रोक लगनी चाहिए। इससे देश की प्रतिष्ठा व छवि को धक्का लगता है।

इससे पहले SIT की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंदरगी ने मामले से जुड़ी जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में अदालत में पेश की। इस दौरान उन्होंने कहा, इस प्रकरण में कुछ और संदिग्ध आरोपियों की पहचान की गई है, लेकिन हम उनका पता नहीं लगा पा रहे हैं। क्योंकि कई आरोपियों ने अपने घर व फोन नबंर बदल लिया है। कुछ तो अब नई पहचान के साथ रह रहे हैं। इसी तरह दाभोलकर मामले में भी संदिग्ध आरोपियों की पहचान की गई है। सीबीआई की ओर से पैरवी कर रहे एडिशनल सालिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि सीबीआई को भी आरोपियों की तलाश करने में दिक्कत हो रही है।

आरोपियों को पकड़ने पैसा चाहिए तो हमें बताए 

इन दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस एससी धर्माधिकारी व जस्टिस भारती डागरे की बेंच ने कहा कि सीबीआई व SIT मामले से जुड़े आरोपियों की तलाश करने के लिए बेहतर तकनीक व विशेषज्ञों की मदद ले। सीबीआई व SIT पैसे की कमी को आधार बनाकर बेहतर तकनीक के इस्तेमाल से खुद को वंचित न रखे। सीबीआई व SIT हमे बताए उसे किस तकनीक की जरुरत है हम निधि आवंटित करने का निर्देश जारी करेंगे। बेंच ने SIT व सीआईडी को इस मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच ऐजेंसी (एनआईए) से भी सहयोग लेने का सुझाव दिया। गौरतलब है कि 20 दिसंबर 2013 को पुणे में दाभोलकर की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी थी जब वे सुबह की सैर पर निकले थे। वहीं पानसरे की कोल्हापुर में 16 फरवरी 2015 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।