दैनिक भास्कर हिंदी: फिर बढ़ सकती है केंद्र और ममता के बीच टकरार, केंद्रीय नियुक्ति के लिए चीफ सेक्रेटरी को अभी तक नहीं मिली मंजूरी

May 31st, 2021

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। केंद्र ने पश्चिम बंगाल चीफ सेक्रेटरी अलापन बंदोपाध्याय को 31 मई की सुबह 10 बजे तक दिल्ली रिपोर्ट करने के लिए कहा था। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बंदोपाध्याय को राज्य सरकार से अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में अब केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच फिर से टकराव के हालात बन सकते हैं। 

ऑल इंडिया सर्विस ऑफिसर्स के डेपुटेशन पर रूल 6(1) के मुताबिक, किसी राज्य के काडर के अधिकारी की प्रतिनियुक्ति केंद्र या अन्य राज्य या सार्वजनिक उपक्रम में संबंधित राज्य की सहमति से की जा सकती है। भारतीय प्रशासनिक सेना (काडर) नियम-1954 के तहत, कोई असहमति होने पर मामले पर निर्णय केंद्र सरकार और राज्य सरकार कर सकती है या संबंधित राज्य सरकार केंद्र सरकार के फैसले को प्रभावी कर सकती है।

इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में इसी तरह का एक विवाद देखने को मिला था। 3 IPS अधिकारियों के ट्रांसफर के एकतरफा आदेश राज्य सरकार ने नहीं माने थे। कुछ साल पहले तमिलनाडु के DGP को भी इसी तरह दिल्ली रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें रिलीव करने से इनकार कर दिया था।

बता दें कि बतौर मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय का कार्यकाल खत्म हो गया था, लेकिन बीते दिनों ही ममता सरकार ने तीन महीने के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था। अलपन बंदोपाध्याय 1987 बैच के आईएएस अफसर हैं। वो हावड़ा समेत कई जिलों के डीएम भी रह चुके हैं। उन्हें पिछले साल सितंबर में राजीव सिन्हा के रिटायर्ड होने के बाद पश्चिम बंगाल का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था। उन्हें ममता बनर्जी का करीबी अफसर माना जाता है।

केंद्र ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब शुक्रवार को पीएम मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बैठक को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। दरअसल, यास साइक्लोन से प्रभावित इलाकों का एरियल सर्वे करने पश्चिम बंगाल पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रिव्यू मीटिंग में हिस्सा लिया था। लेकिन इस मीटिंग में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं हुई। ममता बनर्जी चक्रवात प्रभावित इलाकों के सर्वेक्षण के लिए निकल गईं। इस दौरान मुख्य सचिव अल्पन बंदोपाध्याय भी मौजूद थे।

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