दैनिक भास्कर हिंदी: प्रेमिका की दादी और भाई की हत्या करने वाला ट्रेन के सामने कूदा, मौके पर मौत

December 12th, 2020

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  गिट्टीखदान थाना क्षेत्र हजारीपहाड़ इलाके के श्रीकृष्ण नगर में दोहरे हत्याकांड ने जहां शहरवासियों को हिला दिया, वहीं पुलिस की निष्क्रियता की पोल भी खुल गई है। घटना के बाद अगर पुलिस आरोपी को पकड़ने में तत्परता दिखाती, तो आरोपी शायद आत्महत्या नहीं कर पाता और पुलिस की गिरफ्त में होता। आरोपी ने ट्रेन के सामने छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली है। वह शहर से भागने की फिराक में था, लेकिन रुपए का इंतजाम नहीं होने से वह भाग नहीं सका। इस प्रकरण के संबंध में परिजन बात करने से इनकार कर रहे हैं। 

दोनों की साथ में निकाली गई अंतिम यात्रा
सूत्रों के अनुसार आरोपी हंसापुरी खदान निवासी मोईन खान गुलाम सरवर खान (18) था। मोईन कक्षा 10वीं तक शिक्षित था। उसके पिता का मानकापुर उड़ान पुल के पास राज नामक फेब्रिकेशन और कबाड़ की दुकान है। गुरुवार को लगभग ढाई से तीन बजे मोईन ने चाकू से हजारी पहाड़ निवासी प्रमिला उर्फ लक्ष्मीबाई धुर्वे (70) और उनका पोता यश धुर्वे (10) की बारी-बारी से नृशंसता से हत्या कर दी थी, क्योंकि प्रमिला पोती और आरोपी के प्रेम संबंधों में बाधा बनी हुई थी। शुक्रवार को दादी-पोते की अंतिम यात्रा साथ में निकाली गई।

मित्रों से संपर्क  में था
घटना को अंजाम देने के बाद माेईन अपनी दुकान की तरफ गया। फोन के जरिए कुछ मित्रों के संपर्क में था।  पुलिस के डर से वह मानकापुर-कोराड़ी और गोधनी परिसर में घूमते रहा। पुलिस ने धुर्वे परिवार से मोईन का मोबाइल नंबर प्राप्त किया। जब लोकेशन खंगाला गया, तो वह कोराड़ी रोड गोधनी का मिला। अगर पुलिस तत्पता दिखाती, तो मोईन को जीवित पकड़ा जा सकता था, लेकिन लोकेशन मिलने के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। 

पिता ने की शव की पहचान
गुरुवार की रात में ही लगभग साढ़े दस से पौने ग्यारह बजे के बीच गोधनी रेलवे स्टेशन के पोल नंबर 1037-79 के पास ट्रेन की चपेट में अाने से एक युवक मृत अवस्था में रेलवे पुलिस को मिला। रेलवे पुलिस ने इसकी जानकारी शहर पुलिस के नियंत्रण कक्ष को दी। तब मानकापुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। शक के आधार पर तत्काल मोईन के पिता गुलाम सरवार को सूचना देकर मौके पर बुलाया गया। तब गुलाम सरवर ने शव की पहचान अपने बेटे मोईन खान के रूप में की। 

पुलिस का सता रहा था डर
माना जा रहा है कि मोईन ट्रेन से शहर से भागने की फिराक में था, जिससे वह गोधनी रेलवे स्टेशन पर गया होगा। उसके पास रुपए नहीं थे, जिससे उसने मित्र नौशाद को फोन कर यह कह कर 5 हजार रुपए मांगे कि पिता के दिए हुए पांच हजार रुपए कहीं िगर गए हैं, लेकिन नौशाद से उसे रुपए नहीं मिले। इस बीच पुलिस के हाथ लगने का डर भी उसे सता रहा होगा, जिससे उसने ट्रेन के सामने छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली।
  
घर से दुकान जाने निकला था

घटना के बारे में कुछ भी जानकारी होने से पिता गुलाम सरवर ने इनकार किया है। वह बात करने की स्थिति में नहीं थे। बस इतना ही बता पाए कि उनके दुकान पर जाने के बाद लगभग साढ़े दस बजे मोईन भी दुकान के लिए घर से रवाना हुआ था।

हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं
दोहरे हत्यांकाड़ के अंजाम देने वाले मोईन खान  द्वारा आत्महत्या करना पुलिस की विफलता मानी जा रही है। अपर पुलिस आयुक्त सुनील फुलारी की पत्र परिषद में लोकेशन मिलने के बाद भी मोईन को नहीं पकड़े जाने का मुद्दा गूंजा तो अपर आयुक्त का कहना था कि हर सवाल का जवाब देना वह जरूरी नहीं समझते हैं। इससे कुछ समय के लिए पत्र परिषद का माहौल गर्माया हुआ था।

तीन दोस्तों से थाने में पूछताछ
मोइन खान के तीन दोस्तों को पुलिस ने थाने बुलाकर पूछताछ शुरू की है। शुक्रवार को देर शाम तक गिट्टीखदान थाने में पुलिस उपायुक्त विनीता साहू स्वयं मौजूद होकर पूछताछ कर रही थीं।

टाल गए बात
आरोपी घटनास्थल से गोधनी रेलवे स्टेशन तक कैसे पहुंचा इस बारे में पूछने पर गिट्टीखदान के पुलिस निरीक्षक सुनील चौहान से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने मामले की जांच चल रही है कह कर बात टाल दी।

पुलिस का दावा
पुलिस ने दावा किया है कि आरोपी ने मौत को गले लगाने से पहले अपने एक दोस्त को फोन पर उड़ानपुल से या फिर तालाब में कूदकर जान देने की बात की थी। वह सनकी किस्म का युवक था। 

हाईटेक पुलिस की खुली पोल
जब भी कोई गंभीर वारदात इस शहर में हुई है, तब शहर पुलिस के दावों की पोल खुलकर सामने आती रही है। गिट्टीखदान थाना क्षेत्र हजारीपहाड़ इलाके में श्रीकृष्ण नगर में दोहरे हत्याकांड ने पुलिस के हाईटेक होने के दावे की पोल खोल दी है।
1-सूत्रों के अनुसार आरोपी की खोजबीन करने के लिए घटनास्थल के आसपास के जिस सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को पुलिस खंगालने में लगी रही, वे पहले से ही बंद थे।
2-घटना को अंजाम देने के बाद करीब 8 घंटे तक आरोपी मोईन खान पुलिस के साथ आंख-मिचौली का खेल खेलता रहा। उसके मोबाइल फोन को भी पुलिस ट्रेस नहीं कर पा रही थी।
3-आरोपी की खोजबीन के लिए गिट्टीखदान थाने के डीबी स्क्वॉड और क्राइम ब्रांच की टीम जांच पड़ताल कर रही थी। चौंकाने वाली बात यह है कि देर रात तक पुलिस आरोपी को नाबालिग बताती रही, जबकि आरोपी बालिग बताया जा रहा है। इससे पुलिस की मंशा पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
4- अगर पुलिस तत्पर होती, तो इसमें कोई दो राय नहीं कि आरोपी को जीवित पकड़ा जा सकता था। पुलिस आरोपी का मोबाइल फोन और उस घातक शस्त्र को भी नहीं ढूंढ़ पाई है, जिससे प्रमिला और यश की हत्या की गई।